पटना। बिहार की सियासत इन दिनों अपने चरम पर है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे नेताओं के बयानों में भी तल्खी बढ़ती जा रही है। एनडीए और महागठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में अब (Chirag Paswan on Muslim CM) को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने महागठबंधन पर तीखा हमला बोला है और अपने पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान के बलिदान की याद दिलाई है।
“2005 में भी नहीं था तैयार, 2025 में भी वही सोच…” – चिराग का सीधा निशाना RJD पर
चिराग पासवान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “2005 में मेरे नेता और पिता ने मुस्लिम मुख्यमंत्री के समर्थन में अपनी पार्टी तक कुर्बान कर दी थी। तब आपने उनका साथ नहीं दिया। आज भी वही स्थिति है – न मुस्लिम मुख्यमंत्री देने को तैयार हैं, न उपमुख्यमंत्री।”
उनका यह बयान सीधा (RJD on Muslim CM) पर निशाना माना जा रहा है। चिराग ने सवाल उठाया कि आखिर 18 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी वाले समाज को अब तक सम्मानजनक हिस्सेदारी क्यों नहीं दी गई?
राजनीतिक संतुलन पर सियासी तूफान, सीट शेयरिंग से बढ़ा तनाव
महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग के बाद 14%, 18% और 2.5% के समीकरणों ने नया तूफान खड़ा कर दिया है।
जानकारों के मुताबिक, यह विवाद तब और गहराया जब महागठबंधन ने सीएम और डिप्टी सीएम के चेहरों की घोषणा की, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय के लिए किसी ठोस प्रतिनिधित्व की बात नहीं हुई।
इसी मुद्दे पर अब (Chirag Paswan) ने अपने तीखे तेवर दिखाते हुए सियासी माहौल गर्मा दिया है।
“बंधुआ वोट बैंक बने रहोगे तो सम्मान नहीं मिलेगा” – चिराग का बड़ा बयान
अपने बयान में चिराग ने लिखा, “अगर आप बंधुआ वोट बैंक बने रहेंगे, तो सम्मान और भागीदारी कैसे मिलेगी?”
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली है। समर्थक जहां इसे ‘साहसिक बयान’ बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ मान रहे हैं।
लेकिन इतना तय है कि (Chirag Paswan on Muslim CM) ने एक पुराने घाव को फिर से हरा कर दिया है।
20 साल पुरानी यादों से गूंजी राजनीति, अब नई जंग की तैयारी
2005 की घटना का जिक्र करते हुए चिराग ने अपने पिता की राजनीतिक कुर्बानी को याद किया। उस समय रामविलास पासवान ने मुस्लिम मुख्यमंत्री के समर्थन में अपने गठबंधन से अलग राह चुनी थी।
अब 2025 के चुनावी मौसम में वही अध्याय एक बार फिर से सुर्खियों में है।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि चिराग का यह बयान सिर्फ इतिहास याद कराने के लिए नहीं, बल्कि महागठबंधन के भीतर की असहजता को उजागर करने के लिए भी है।
क्या बदलेगी मुस्लिम पॉलिटिक्स की दिशा?
चिराग पासवान के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर “मुस्लिम प्रतिनिधित्व” की बहस तेज हो गई है।
यह सवाल अब हर चर्चा का केंद्र बन गया है — क्या 20 साल बाद भी बिहार की राजनीति वही पुरानी लकीर पर चल रही है, जहां समाज की सबसे बड़ी आबादी को सिर्फ वोट बैंक समझा जाता है?


