सीजी भास्कर, 30 मई : पश्चिम बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल, विवादित और आक्रामक राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आलीशान आवास ‘शांतिनिकेतन’ पर शनिवार को राज्य की सीआईडी (CID) की टीम ने अचानक धावा बोल दिया।
यह पूरी आक्रामक कार्रवाई विधानसभा के भीतर हुए एक कथित विधायक सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले की जांच के सिलसिले में की गई है। सीआईडी के चार आला अधिकारियों की टीम जब लाव-लश्कर के साथ उनके बंगले पर नोटिस तामील कराने पहुंची, तो वहां सांसद मौजूद नहीं थे। इस अप्रत्याशित और कड़े घटनाक्रम (CID Abhishek Banerjee Notice) ने पूरी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार और टीएमसी खेमे के भीतर एक गहरा राजनीतिक सस्पेंस पैदा कर दिया है, क्योंकि जांच की आंच अब सीधे पार्टी के नंबर-दो के नेता के बेडरूम तक पहुंच चुकी है।
दरअसल, यह पूरा मामला केवल कुछ हस्ताक्षरों की हेराफेरी का नहीं है, बल्कि इसके पीछे बंगाल विधानसभा के सबसे रसूखदार ‘नेता प्रतिपक्ष’ के पद को हथियाने के लिए रची गई एक खौफनाक प्रशासनिक साजिश का सस्पेंस छुपा हुआ है। आरोप है कि कैबिनेट मंत्री का दर्जा रखने वाले इस महत्वपूर्ण पद पर शोभनदेब चट्टोपाध्याय की नियुक्ति के लिए विधानसभा सचिवालय में जो समर्थन पत्र जमा कराया गया था, उसमें टीएमसी के कई विधायकों के फर्जी दस्तखत किए गए थे। जब इस बड़े और संगीन फर्जीवाड़े (CID Abhishek Banerjee Notice) की भनक विधानसभा सचिवालय को लगी, तो कोलकाता के हरे स्ट्रीट थाने में एक कड़ा मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसकी तफ्तीश अब खुद सीआईडी कर रही है।
पैन कार्ड जब्त होने से बढ़ा आक्रोश
इस पूरे कांड का सबसे कड़ा और आक्रामक पहलू चौरंगी विधानसभा सीट से पांच बार की सीनियर टीएमसी विधायक नयना बनर्जी के हस्ताक्षरों को लेकर सामने आया है। फॉरेंसिक जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि समर्थन पत्र पर किए गए नयना बनर्जी के दस्तखत, उनके शपथ ग्रहण के समय किए गए आधिकारिक हस्ताक्षरों से बिल्कुल भी मेल नहीं खाते। इसी सिलसिले में सीआईडी की एक आक्रामक टीम गुरुवार की शाम को भारी पुलिस बल और वीडियोग्राफर के साथ सीधे नयना बनर्जी के सरकारी आवास पर घुस गई। जांच के नाम पर उनके पैन कार्ड और अन्य गोपनीय दस्तावेजों की तस्वीरें खींचने के इस कड़े ढर्रे (CID Abhishek Banerjee Notice) ने पूरी तृणमूल कांग्रेस को आगबबूला कर दिया है।
नयना बनर्जी ने अपनी ही सरकार की सीआईडी पर बेहद आक्रामक प्रहार करते हुए कहा कि एक पांच बार की सम्मानीय महिला विधायक के साथ अपराधियों जैसा सलूक करना घोर अपमानजनक है। उन्होंने इस पूरे अमानवीय व्यवहार की शिकायत सीधे पार्टी लीडरशिप से की है। इस बीच, सीआईडी की टीम इसी फर्जीवाड़ा केस में टीएमसी के कद्दावर नेता कुणाल घोष, बोलपुर विधायक चंद्रनाथ सिन्हा और कैनिंग ईस्ट के विधायक बहारुल इस्लाम से घंटों तक कड़ाई से पूछताछ कर चुकी है। सीआईडी का यह कड़ा नियम (CID Abhishek Banerjee Notice) साफ करता है कि इस बार फर्जीवाड़ा करने वाले किसी भी सफेदपोश नेता को बख्शने के मूड में एजेंसी बिल्कुल नहीं है।
वे गलती से कहीं और चले गए थे!
दूसरी तरफ, सीआईडी के अफसरों को अपने घर पर न पाकर खुद सांसद अभिषेक बनर्जी ने मीडिया के सामने आकर इस पूरी कार्रवाई पर बेहद तीखा और आक्रामक तंज कसा है। उन्होंने हंसते हुए कहा कि, सीआईडी के अफसरों को मुझे एक नोटिस थमाना था, जिसे मुझे खुद ही रिसीव करना था, इसलिए वे मेरे दरवाजे पर इंतजार कर रहे थे। लेकिन वे इतने नासमझ हैं कि वे रास्ता भूलकर गलती से कहीं और चले गए थे, क्योंकि उन्हें शायद पता ही नहीं था कि डायमंड हार्बर का सांसद कोलकाता में कहां रहता है।
अभिषेक बनर्जी ने मुस्कुराते हुए मीडिया के कैमरों की तरफ देखकर कहा कि, “अगर कानून के रखवाले मुझे कोई नया नोटिस देना ही चाहते हैं, तो उन्हें छिपने की जरूरत नहीं है, मैं यहीं सीना तानकर खड़ा हूं और मेरी चाल की गति (CID Abhishek Banerjee Notice) को कोई भी फर्जी एजेंसी रोक नहीं सकती।” अब सबसे बड़ा राजनीतिक सस्पेंस यह है कि क्या सीआईडी इस मामले में अभिषेक बनर्जी को सीधे तौर पर मुख्य साजिशकर्ता बनाने की तैयारी कर रही है? शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने भी फिलहाल इस संवेदनशील मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। बहरहाल, कोलकाता के ‘शांतिनिकेतन’ बंगले पर हुई इस हलचल ने यह तो साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में एक बहुत बड़ा भूचाल आने वाला है।




