सीजी भास्कर, 03 फरवरी | बिलासपुर में चर्चित Coal Levy Scam Bail Rejected मामले में हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के आर्थिक अपराध न केवल कानून व्यवस्था, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी सीधा नुकसान पहुंचाते हैं।
फरारी और भूमिका बनी राहत न मिलने की वजह
अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी ड्राइवर नारायण साहू पिछले दो वर्षों से फरार चल रहा है। उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी है। न्यायालय ने माना कि लंबे समय तक फरार रहना और जांच में सहयोग न करना अग्रिम जमानत देने के खिलाफ मजबूत आधार है।
अवैध नकदी संग्रह में अहम भूमिका का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार नारायण साहू पर Coal Levy Scam के तहत लगभग 13 करोड़ रुपये की अवैध नकदी एकत्र करने का आरोप है। इसमें से करीब 7.5 करोड़ रुपये अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाए जाने की बात जांच में सामने आई है, जिसे अदालत ने गंभीर माना।
प्रति टन वसूली से बना संगठित रैकेट
जांच में यह भी सामने आया कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयला परिवहन के नाम पर प्रति टन 25 रुपये की दर से अवैध वसूली की जा रही थी। यह पूरी व्यवस्था एक संगठित रैकेट के रूप में काम कर रही थी, जिससे सैकड़ों करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई।
540 करोड़ की वसूली, संपत्तियों की जब्ती
रिकॉर्ड के अनुसार इस अवधि में लगभग 540 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों ने अब तक इस मामले से जुड़ी करीब 273 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अटैच किया है, जो मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
अब तक 11 गिरफ्तार, जांच जारी
मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 35 से अधिक लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायतें दाखिल की गई हैं। अदालत को बताया गया कि Economic Offence Case के तहत आगे भी जांच जारी है और नए खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
न्यायालय का स्पष्ट संदेश
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नरमी समाज और सिस्टम दोनों के लिए घातक हो सकती है। अदालत का यह फैसला High Court Bail Order के रूप में आने वाले मामलों के लिए भी एक कड़ा संकेत माना जा रहा है।





