सीजी भास्कर, 5 अक्टूबर। राजस्थान और मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सीरप के कारण बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार की एडवाइजरी के आधार पर कई राज्यों ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। तमिलनाडु के बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और केरल ने कोल्ड्रिफ कफ सीरप (Coldref Cough Syrup Ban) पर रोक लगा दी है। झारखंड ने इसकी बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया है, जबकि उत्तराखंड में दवा की दुकानों पर छापेमारी की जा रही है। पंजाब, बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
मध्य प्रदेश में अब तक 10 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि राजस्थान में चार बच्चों की जान गई है। दोनों राज्यों ने सीरप बनाने वाली कंपनी के सभी उत्पादों पर रोक लगा दी है। श्रीसन कंपनी (Coldref Cough Syrup Ban) द्वारा बनाए जाने वाला यह सीरप तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित यूनिट से तैयार होता है। जांच में इसके एसआर-13 बैच में डायथिलीन ग्लाइकाल (डीईजी) की मात्रा 48.6 प्रतिशत पाई गई, जबकि मानक सीमा 0.1 प्रतिशत है।
केंद्र और राज्यों की जांच
तमिलनाडु सरकार ने रिपोर्ट आते ही सीरप पर प्रतिबंध लगाया और अन्य राज्य भी तुरंत एक्शन में आ गए। मध्य प्रदेश सरकार की जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि अब तक वहां खुद की जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने दावा किया कि नौ सैंपल सुरक्षित पाए गए हैं, लेकिन ताजा कार्रवाई तमिलनाडु की रिपोर्ट पर आधारित है। मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग (Coldref Cough Syrup Ban) अब केंद्र की टीमों के साथ मिलकर स्थिति पर निगरानी रखे हुए है।
राज्यों ने बढ़ाई सतर्कता
छिंदवाड़ा, राजस्थान के सीकर, भरतपुर और चुरू में बच्चों की मौत के मामले सामने आए। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कोल्ड्रिफ की सप्लाई सरकारी अस्पतालों में नहीं की जा रही है और निजी अस्पतालों में भी रोक के आदेश दिए गए हैं। उत्तराखंड, पंजाब और बंगाल ने भी अपने-अपने स्तर पर निगरानी तेज कर दी है। झारखंड ने खुदरा और थोक विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे उपलब्ध प्रतिबंधित कफ सीरप (Coldref Cough Syrup Ban) तुरंत वापस करें।
अन्य राज्यों की कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश ने भी एहतियात बरतते हुए बद्दी में तैयार होने वाले ‘नेक्सा डीएस’ कफ सीरप के उत्पादन पर रोक लगा दी है। वहां से लिए गए नमूनों की जांच जारी है। राजस्थान सरकार ने जयपुर स्थित कंपनी कायसन फार्मा की सभी 19 दवाओं पर रोक लगा दी है, जिन्हें मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत वितरित किया जाता था।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला दवा उत्पादन और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी संदिग्ध बैच को तुरंत बाजार से हटाया जाए और लोगों को सतर्क किया जाए।


