सीजी भास्कर, 14 जून : मकान निर्माण कार्य में लापरवाही और अनुबंध की शर्तों (Consumer Commission) का पालन नहीं करने वाले ठेकेदार के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ठेकेदार को सेवा में कमी और व्यावसायिक कदाचार का दोषी मानते हुए शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति और मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही अधूरे निर्माण कार्य को पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मामला जगदलपुर का है।
मामला उस समय सामने आया जब एक उपभोक्ता ने आयोग में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि ठेकेदार ने अनुबंध के अनुसार न तो निर्धारित समय सीमा में मकान निर्माण कार्य पूरा किया और न ही निर्माण की गुणवत्ता तय मानकों के अनुरूप रही। शिकायतकर्ता का कहना था कि बार-बार आग्रह और अतिरिक्त समय दिए जाने के बावजूद कार्य अधूरा छोड़ दिया गया।
गुणवत्ता जांच में सामने आई खामियां
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्ट में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे। जांच में कई तकनीकी कमियां और निर्माण संबंधी खामियां सामने आईं। आयोग ने माना कि उपभोक्ता को अनुबंध के अनुरूप सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे उसे आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ा।
आयोग ने माना सेवा में कमी
सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जिला उपभोक्ता आयोग ने ठेकेदार के आचरण को सेवा में कमी और व्यावसायिक कदाचार की श्रेणी में माना। आयोग ने आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किया जाए तथा अधूरे निर्माण कार्य को पूरा किया जाए। इसके अलावा उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा और असुविधा को देखते हुए अलग से मुआवजा देने के भी निर्देश दिए गए हैं।
उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा को मिला बल
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भी सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी है कि वह अनुबंध के अनुरूप और निर्धारित गुणवत्ता के साथ सेवा उपलब्ध कराए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उपभोक्ता को कानूनी संरक्षण प्राप्त है और संबंधित पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही यह निर्णय निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों और सेवा प्रदाताओं के लिए जवाबदेही का स्पष्ट संदेश भी देता है।
निर्माण क्षेत्र में जवाबदेही का संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाते हैं और सेवा प्रदाताओं को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सजग बनाते हैं। आयोग के इस आदेश से निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और अनुबंधीय शर्तों के पालन को लेकर सख्त संदेश गया है।





