सीजी भास्कर, 3 नवंबर। रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान चना बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बुवाई से पहले किसान चने के बीजों का उचित बीजोपचार (Crop Protection Tips) कर लें, तो मुरझाने (विल्ट) और सूखने की समस्या लगभग समाप्त की जा सकती है। बीजोपचार न केवल पौधों की शुरुआती वृद्धि को मजबूत करता है, बल्कि फसल को बीमारियों और कीटों से भी बचाता है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, चने की फसल में अक्सर फ्यूजेरियम विल्ट, एस्कोकाइटा ब्लाइट और ग्रे मोल्ड जैसी बीमारियाँ देखी जाती हैं। इनसे बचाव के लिए बीजों को बुवाई से कम से कम 24 घंटे पहले फफूंदनाशक और कीटनाशक (Crop Protection Tips) से उपचारित करना चाहिए। इससे दवाओं को बीज पर अच्छी तरह से चिपकने का समय मिलता है और बीमारियों के प्रवेश की संभावना कम हो जाती है।
बीजोपचार के फायदे
फफूंदनाशकों से उपचारित बीज फसल को मिट्टी जनित रोगों से बचाते हैं। कीटनाशकों का प्रयोग करने से पौधों पर एफिड्स, थ्रिप्स और लीफ माइनर जैसे कीटों का प्रभाव नहीं होता। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बीजोपचार करने से पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है।
बीजोपचार के लिए पांच आवश्यक तत्व
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि एक किलो बीज के लिए किसान 2.5 ग्राम कार्बोक्सिन और 5 ग्राम ट्राइकोडर्मा पाउडर (Crop Protection Tips) मिलाकर बीजों का उपचार करें। इसके साथ 1 ग्राम अमोनियम मोलिब्डेट का प्रयोग करने से पौधों की जड़ों में गांठें (नोड्यूल्स) बढ़ती हैं, जिससे नाइट्रोजन फिक्सेशन की प्रक्रिया बेहतर होती है। इससे पौधों की वृद्धि तेज होती है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।
इसके अतिरिक्त, किसानों को रायजोबियम कल्चर और पीएसबी (फॉस्फेट सॉल्यूबिलाइजिंग बैक्टीरिया) का भी उपयोग करना चाहिए। दोनों को एक किलो बीज पर 5-5 ग्राम की मात्रा में मिलाया जा सकता है। यह जैव उर्वरक मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और पौधों को पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण करने में मदद करते हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि चने का बीजोपचार (Crop Protection Tips) अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि फसल सुरक्षा की पहली जरूरत है। इससे किसानों को बीमारियों से बचाव के साथ स्थायी और अधिक उपज की गारंटी मिलती है।


