अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयानों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने इशारों में क्यूबा को लेकर सख्त रुख की बात कही, जिसके बाद (Cuba Tension Crisis) को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कूटनीतिक गलियारों में इसे संभावित रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
हालिया घटनाओं से और संवेदनशील हुआ माहौल
हाल ही में Venezuela में हुई अमेरिकी कार्रवाई के बाद स्थिति और ज्यादा नाजुक हो गई है। वहां के राष्ट्रपति Nicolás Maduro को हिरासत में लिए जाने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को और तेज कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद (US Latin Policy) को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
संप्रभुता पर सख्त रुख, झुकने से इनकार
Cuba के राष्ट्रपति Miguel Díaz-Canel ने अमेरिकी संकेतों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि उनका देश किसी भी बाहरी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने देश की संप्रभुता की रक्षा का भरोसा दिलाया, जिससे (Cuba Sovereignty Stand) और मजबूत होता नजर आ रहा है।
दशकों पुराना है दोनों देशों के बीच तनाव
अमेरिका और क्यूबा के बीच टकराव कोई नया नहीं है। 1959 की क्रांति के बाद दोनों देशों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। सोवियत संघ से क्यूबा की नजदीकियां और अमेरिकी कंपनियों के राष्ट्रीयकरण के बाद प्रतिबंधों का दौर शुरू हुआ, जो आज तक जारी है। Cuban Missile Crisis जैसे घटनाक्रम इस इतिहास के बड़े उदाहरण हैं।
पहले से संकट में जूझ रहा क्यूबा
वर्तमान में क्यूबा आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। वेनेजुएला से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण ईंधन की कमी और बिजली संकट गहरा गया है। हाल के महीनों में बड़े स्तर पर ब्लैकआउट की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस स्थिति ने (Cuba Economic Crisis) को और गंभीर बना दिया है।
लैटिन अमेरिका पर पड़ सकता है बड़ा असर
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर पूरे लैटिन अमेरिका क्षेत्र पर पड़ सकता है। वेनेजुएला के बाद क्यूबा को लेकर आक्रामक संकेतों ने (Geopolitical Risk Alert) को बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में अमेरिका की रणनीति और क्यूबा की प्रतिक्रिया ही इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।


