सीजी भास्कर, 09 सितम्बर। राजधानी रायपुर इस बार पूरी तरह (Cultural Festival) के रंगों से सराबोर होने जा रही है। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित लोक रंग पर्व 2025 का शुभारंभ 9 सितम्बर से महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय के मुक्ताकाशी मंच, सिविल लाइन्स में हो गया है। यह आयोजन 13 सितम्बर तक चलेगा।
पांच दिवसीय इस पर्व में हर शाम 7 बजे से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं की झलक दर्शकों को देखने को मिलेगी। मंच पर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोकगाथा, लोकनृत्य, लोकसंगीत और नाचा-गम्मत की विविध प्रस्तुतियाँ होंगी, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करेंगी।
इस वर्ष के कार्यक्रम में देवार गीत, करमा नृत्य, पंडवानी, बांसगीत, सुआ नृत्य, भरथरी, ढोलामारू, राउत नाचा, पंथी नृत्य, लोरिक चंदा, संस्कार गायन और जसगीत जैसी विधाओं को शामिल किया गया है। (Traditional Dance) और गीतों की ये श्रृंखला न केवल बुजुर्गों को अपने बचपन की याद दिलाएगी बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़ने का मौका भी देगी।
पारंपरिक लोकगाथाओं में भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू और लोरिक चंदा खास आकर्षण(Cultural Festival ) होंगे। लोकनृत्यों में सुआ, करमा और पंथी की ताल पर दर्शक थिरक उठेंगे। वहीं बांसगीत और देवारी गीत लोकगायन का रस घोलेंगे। लोकसंगीत में ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन पूरे वातावरण को सुरों से सराबोर करेंगे।
प्रदेशभर से आए लोक कलाकार(Cultural Festival) अपनी-अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों से आए इन कलाकारों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देना भी है कि छत्तीसगढ़ी परंपराएँ और लोककला आज भी उतनी ही जीवंत हैं जितनी सदियों पहले थीं। यही वजह है कि लोक रंग पर्व हर साल (Folk Music) प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर बन जाता है। इस तरह यह आयोजन न केवल राजधानी रायपुर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि यह छत्तीसगढ़ी संस्कृति की आत्मा को दर्शाने वाला पर्व बन चुका है।


