सीजी भास्कर 26 फ़रवरी रायपुर में चल रहे बजट सत्र के चौथे दिन सदन का माहौल उस वक्त अचानक गंभीर हो गया, जब विपक्ष ने प्रदेश में कस्टोडियल डेथ (Custodial Death in Chhattisgarh) के मामलों को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। सवालों के केंद्र में जेलों की स्थिति, बंदियों की मौत और न्यायिक जांच की रफ्तार रही, जिस पर सदन में देर तक चर्चा हुई।
विधानसभा में यह मुद्दा उठा कि प्रदेश की जेलों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक कैदी रखे जा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, कई जेलों में भीड़ 150 फीसदी से ज्यादा पहुंच चुकी है। इसे लेकर मानवाधिकार से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठे और यह पूछा गया कि क्या भीड़भाड़, संसाधनों की कमी और निगरानी व्यवस्था कमजोर होने से (Jail Overcrowding Impact) जैसे मामले बढ़ रहे हैं।
सदन को बताया गया कि बीते एक साल की अवधि में जेलों में हुई अस्वाभाविक मौतों के मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है। कुछ प्रकरणों में जांच पूरी हो चुकी है, जबकि कई मामलों में रिपोर्ट आना बाकी है। विपक्ष ने सवाल उठाया कि देरी से पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है, जो कि (Judicial Inquiry Status) से जुड़ा गंभीर पहलू है।
सदन में चर्चा केवल जेलों तक सीमित नहीं रही। हत्या, लूट और फिरौती जैसे गंभीर अपराधों के बढ़ते मामलों का भी जिक्र हुआ। इसके साथ ही अंतर्राज्यीय ड्रग तस्करी पर कार्रवाई को लेकर आंकड़े मांगे गए। विपक्ष ने कहा कि कानून-व्यवस्था की चुनौतियां सीधे तौर पर Custodial Death in Chhattisgarh (Law and Order in CG) जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ती हैं।
Custodial Death in Chhattisgarh पर सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से बताया गया कि जेलों में हुई मौतों के मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार जांच की जा रही है। जिन प्रकरणों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनकी रिपोर्ट संबंधित विभागों को सौंपी जा चुकी है, जबकि बाकी मामलों में जांच जारी है। सरकार ने भरोसा दिलाया कि Custodial Death in Chhattisgarh से जुड़े सभी मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।






