सीजी भास्कर, 20 जून : राजधानी रायपुर में साइबर अपराधियों ने ठगी (Cyber Fraud Alert) का नया तरीका अपनाते हुए एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी को लाखों रुपये का चूना लगा दिया। ई-चालान के नाम पर भेजी गई एक फर्जी APK फाइल डाउनलोड करते ही साइबर ठगों ने पीड़ित के मोबाइल और बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच बना ली तथा खाते से 2 लाख 63 हजार 673 रुपये निकाल लिए। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ई-चालान समझकर डाउनलोड की फाइल
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मोवा निवासी आशीष वर्मा एक निजी फाइनेंस कंपनी में कार्यरत हैं। उनके मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से आरटीओ ई-चालान से संबंधित संदेश प्राप्त हुआ। संदेश में बताया गया था कि वाहन से संबंधित चालान जारी किया गया है और उसकी जानकारी देखने के लिए संलग्न फाइल डाउनलोड करनी होगी।
संदेश के साथ भेजी गई APK फाइल को वास्तविक समझकर आशीष ने डाउनलोड कर लिया। फाइल ओपन करने के कुछ समय बाद ही साइबर ठगों ने उनके मोबाइल डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर लिया।
मोबाइल हैक कर बैंक खाते तक बनाई पहुंच
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि APK फाइल के माध्यम से मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल हो गया। इसके जरिए साइबर अपराधियों ने मोबाइल में मौजूद बैंकिंग और वित्तीय जानकारी तक पहुंच बना ली।
इसके बाद ठगों ने अलग-अलग डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए पीड़ित के खाते से कुल 2 लाख 63 हजार 673 रुपये ट्रांसफर कर लिए। पूरी प्रक्रिया इतनी तेजी से हुई कि पीड़ित को तत्काल इसकी भनक तक नहीं लगी।
खाते की जांच करने पर हुआ खुलासा
घटना का खुलासा तब हुआ जब आशीष ने अपने बैंक खाते का बैलेंस और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री चेक की। खाते से बड़ी रकम निकाले जाने की जानकारी मिलते ही उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साइबर सेल खंगाल रही डिजिटल ट्रेल
मामले की जांच के लिए साइबर सेल की टीम को भी लगाया गया है। पुलिस ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर, बैंक खाते, यूपीआई आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही रकम जिस खाते में ट्रांसफर हुई है, उसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।
पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अज्ञात नंबर से प्राप्त APK फाइल, लिंक या ऐप को डाउनलोड नहीं करना चाहिए।
साइबर ठग अब बैंक, आरटीओ, बिजली विभाग, कूरियर सेवा और सरकारी एजेंसियों के नाम पर फर्जी संदेश भेजकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। किसी भी संदेश की सत्यता आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित विभाग से पुष्टि करने के बाद ही उस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
लगातार बदल रहे हैं साइबर ठगी के तरीके
विशेषज्ञों के अनुसार APK फाइल आधारित ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। इस तरह की फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल में स्पाईवेयर या मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जिससे साइबर अपराधी मोबाइल स्क्रीन, मैसेज, ओटीपी और बैंकिंग गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। ऐसे मामलों से बचने के लिए केवल Google Play Store या अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी जाती है।





