सीजी भास्कर, 30 अक्टूबर। कृषि विभाग में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारी, जिला उप संचालक कृषि विभाग (डीडीए) जांजगीर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर कार्यरत इस महिला ने दावा किया है कि उन्हें लगातार मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कृषि विभाग के संचालक रायपुर को भेजी शिकायत में कहा कि यह पूरा मामला एक तरह का (DDA Harassment Case) बन चुका है, जिसमें विभागीय नियमों की अनदेखी की गई है।
शिकायत के अनुसार, महिला अधिकारी को संयुक्त निदेशक कृषि (जेडीए) कार्यालय के आदेश से ग्राम रसेड़ा में पदस्थ किया गया था। उनका आरोप है कि डीडीए ललित मोहन भगत ने शुरुआत से ही जानबूझकर परेशान करना शुरू किया। महिला अधिकारी के मुताबिक, डीडीए लगातार उनके खिलाफ पत्राचार कर रहे थे, जिससे वे मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिना किसी सक्षम अथवा विभागीय आदेश के उनका वेतन रोक दिया गया, जो कि पूर्णतः अवैध है और महिला कर्मचारी के साथ किए गए अन्याय का उदाहरण है।
महिला अधिकारी ने यह भी उल्लेख किया कि विभाग में अन्य अटैचमेंट कर्मचारी भी कार्यरत हैं, लेकिन केवल उन्हीं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई व्यक्तिगत शत्रुता और पक्षपात का परिणाम है। इस शिकायत के बाद विभाग ने कृषि विभाग जांजगीर के एसडीओ नीलम आजाद को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। हालांकि, बताया जा रहा है कि जिस दिन महिला अधिकारी को दस्तावेज़ों के साथ पेश होने को कहा गया था, उसी दिन जांच अधिकारी स्वयं कार्यालय में उपस्थित नहीं थीं।
अब उनसे बिना नया पत्र जारी किए ही जवाब मांगा जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह पूरा (DDA Harassment Case) अब विभागीय और मीडिया स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, डीडीए ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “किसी को परेशान करने जैसा कुछ नहीं हुआ है। शिकायत आई है, जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा।”
जांच की निष्पक्षता पर सवाल
महिला अधिकारी ने अपने शिकायत पत्र में कहा है कि अगर जांच उसी अधिकारी के अधीनस्थ कर्मचारी के द्वारा कराई जाएगी, जिस पर आरोप लगे हैं, तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है। कृषि विभाग के कर्मचारियों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं डीडीए ने मीडिया से कहा कि जांच में सब साफ़ हो जाएगा। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अब रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं कि महिला कर्मचारी के आरोपों में कितनी सच्चाई है। यह पूरा प्रकरण प्रशासनिक तंत्र में (DDA Harassment Case) को लेकर कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के सवाल को फिर से केंद्र में ले आया है।


