Deepfake Cyber Fraud का नया जाल
भारत में (Deepfake Cyber Fraud) के जरिए ऑनलाइन ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधियों ने अब एक नया तरीका खोज निकाला है—मशहूर हस्तियों के डीपफेक वीडियो बनाकर लोगों को निवेश और दान के नाम पर फंसाना। पिछले तीन सालों में ऐसे मामलों में 550% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, और इस साल अकेले 70,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने का अनुमान है।
मशहूर चेहरों का दुरुपयोग
ठग अब वित्त मंत्री, उद्योगपति, आध्यात्मिक गुरु और सामाजिक कार्यकर्ताओं जैसे पॉपुलर चेहरों का डीपफेक तैयार कर रहे हैं। (Deepfake Cyber Fraud) में देखे गए केसों में ठगों ने एक जैसी ट्रिक अपनाई—पहले वीडियो वायरल किया, फिर लिंक शेयर कर निवेश का प्रलोभन दिया और आखिर में लाखों-करोड़ों लेकर फरार हो गए।
मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु से आए केस
मुंबई के एक डॉक्टर ने जब मुकेश अंबानी के नाम से चल रहे फर्जी बिजनेस एडवाइस पर भरोसा किया तो 7 लाख रुपये गंवा दिए। हैदराबाद के एक डॉक्टर ने निर्मला सीतारमण के डीपफेक वीडियो पर भरोसा कर 20 लाख रुपये खो दिए। वहीं बेंगलुरु की एक महिला, सद्गुरु के फर्जी वीडियो से प्रभावित होकर, 3.75 करोड़ रुपये (Deepfake Cyber Fraud) का शिकार हो गई।
34.1% ही वापस आ पाते हैं पैसे
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि धोखाधड़ी में गंवाए गए पैसे शायद ही वापस मिलते हैं। पुलिस रिकॉर्ड्स बताते हैं कि वसूली दर केवल 34.1% है। यानी अगर ठगी में 100 रुपये गए तो सिर्फ 34 रुपये ही वापस मिल पाते हैं। अगर शिकायत 48 घंटों के भीतर दर्ज हो तो रकम वापसी की संभावना थोड़ी बढ़ जाती है।
AI ने और बढ़ाई मुश्किलें
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने के बाद यह जानना और कठिन हो गया है कि असली क्या है और नकली क्या। सर्वे बताते हैं कि 69% लोग AI से बनाई गई आवाज़ को पहचान नहीं पाते और (Deepfake Cyber Fraud) का आसान शिकार बन जाते हैं।
सावधानी ही बचाव है
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को किसी भी निवेश, लिंक या विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले सत्यापन जरूर करना चाहिए। खासतौर पर अगर कोई वीडियो किसी मशहूर हस्ती का हो और उसमें निवेश या दान का आग्रह किया गया हो, तो उसे तुरंत संदेह की दृष्टि से देखना चाहिए।





