राजधानी दिल्ली के वर्षों पुराने जल संकट पर अब ठोस समाधान की तस्वीर उभरती दिख रही है। केंद्र सरकार ने लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ बांध परियोजनाओं को औपचारिक मंजूरी देकर आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। Delhi Water Solution के लिहाज से यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे आने वाले करीब 25 वर्षों तक राजधानी की पेयजल जरूरतें पूरी होने की उम्मीद है।
बढ़ती आबादी और घटता जल संतुलन
फिलहाल दिल्ली में रोजाना लगभग 900 मिलियन गैलन पानी का उत्पादन हो रहा है, जबकि मांग 1,100 मिलियन गैलन से अधिक पहुंच चुकी है। करीब दस प्रतिशत आबादी अब भी नियमित पाइप जलापूर्ति से वंचित है। ऐसे में Urban Water Crisis से जूझ रही दिल्ली के लिए ये तीनों परियोजनाएं दीर्घकालिक राहत का आधार बन सकती हैं।
कितनी मिलेगी अतिरिक्त जल आपूर्ति
आधिकारिक आकलन के अनुसार, लखवार बांध से लगभग 135 एमजीडी, रेणुकाजी से करीब 275 एमजीडी और किशाऊ परियोजना से लगभग 372 एमजीडी पानी दिल्ली को मिल सकेगा। इससे न केवल आपूर्ति बढ़ेगी, बल्कि यमुना नदी में पर्यावरणीय प्रवाह (E-Flow) बनाए रखने में भी मदद मिलेगी—जो अब तक एक बड़ी चुनौती रहा है।
यमुना बेसिन में संग्रहित होगा मानसूनी पानी
तीनों परियोजनाएं ऊपरी यमुना बेसिन में स्थित हैं और इनका मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान बहकर व्यर्थ चले जाने वाले पानी को संरक्षित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल Yamuna Basin Projects के तहत मौसमी निर्भरता को कम करेगा और सालभर जल उपलब्धता को संतुलित रखेगा।
परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति
लखवार परियोजना का लगभग 12 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिसे 1990 के दशक में फंड की कमी के कारण रोक दिया गया था। रेणुकाजी परियोजना टेंडरिंग चरण में है, जिसमें 40 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का भी प्रस्ताव है। वहीं किशाऊ परियोजना फिलहाल अंतर-राज्यीय सहमति और प्रशासनिक मंजूरियों की प्रक्रिया में है।
कब तक मिलेगा पानी
संभावित समयसीमा के अनुसार, लखवार परियोजना के 2031 तक, रेणुकाजी के 2032 तक और किशाऊ के 2033 तक पूर्ण होने की संभावना जताई जा रही है। इन तीनों के क्रियान्वयन के साथ दिल्ली को एक स्थायी और संरचित Delhi Water Solution मिलने की उम्मीद है।




