सीजी भास्कर, 08 जनवरी। हिंदी सिनेमा के सबसे दिग्गज और लोकप्रिय कलाकारों में गिने जाने वाले Dharmendra के निधन को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ (Dharmendra State Funeral Controversy) गई है। 24 नवंबर को दुनिया को अलविदा कहने वाले धर्मेंद्र भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके योगदान और सम्मान को लेकर उठ रहे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे। अब इस मुद्दे पर मशहूर लेखिका और कॉलमनिस्ट Shobhaa De का बयान चर्चा में है।
धर्मेंद्र का निधन बेहद शांत तरीके से हुआ। उनकी तबीयत लंबे समय से खराब थी और वे घर पर ही थे, यह बात सभी को मालूम थी। लेकिन जिस तरह से उनका अंतिम संस्कार बेहद सीमित दायरे में हुआ और फैंस को उन्हें आखिरी बार देखने तक का मौका नहीं मिला, उससे कई लोग नाराज भी नजर आए। अब शोभा डे ने इस पूरे मामले को “बड़ी चूक” करार दिया है।
एक इंटरव्यू में शोभा डे से सवाल किया गया कि क्या धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान, यानी स्टेट फ्यूनरल के साथ होना चाहिए था। इसके जवाब में उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “हां, बिल्कुल (Dharmendra State Funeral Controversy) होना चाहिए था। मैंने इस बारे में लिखा भी है। इससे पहले भी कई अभिनेताओं को यह सम्मान दिया जा चुका है, तो धर्मेंद्र को क्यों नहीं?”
उन्होंने आगे कहा कि यह या तो एक गंभीर चूक थी या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण रहे होंगे। शोभा डे के मुताबिक, धर्मेंद्र जैसा अभिनेता, जिसने दशकों तक हिंदी सिनेमा को अपने किरदारों से समृद्ध किया, उस सम्मान का पूरा हकदार था।
शोभा डे ने इस दौरान दिवंगत अभिनेत्री Sridevi का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्हें स्टेट फ्यूनरल दिया गया, तो धर्मेंद्र को इससे वंचित रखना समझ से परे है। उन्होंने कहा, “सबको पता था कि धर्मेंद्र की हालत नाजुक है। अगर चीजों को सही ढंग से प्लान किया जाता, तो यह संभव था।”
उन्होंने यह भी इशारा किया कि धर्मेंद्र की पत्नी और भाजपा सांसद Hema Malini अगर एक कॉल (Dharmendra State Funeral Controversy) कर देतीं, तो पूरा इंतजाम हो सकता था। शोभा डे के शब्दों में, “हेमा मालिनी सांसद हैं। उनके एक फोन करने भर से सब मैनेज हो जाता। जो हुआ, वह निराशाजनक और थोड़ा अजीब भी लगा।”
शोभा डे का यह बयान सामने आने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या भारत में कला और कलाकारों को उनके योगदान के अनुरूप सम्मान मिल पाता है या नहीं। धर्मेंद्र के चाहने वालों के लिए यह मुद्दा अब सिर्फ एक अभिनेता का नहीं, बल्कि सिनेमा के प्रति सम्मान का सवाल बन चुका है।


