रतलाम जिले के धौंसवास गांव में गुरुवार की भोर जैसे ही लोग नींद से उठे, प्रशासनिक टीम पहले से ही बुलडोज़र के साथ गांव की ओर बढ़ चुकी थी। मालवीय समाज की धर्मशाला को हटाने की कार्रवाई अचानक शुरू हुई, और कुछ ही मिनटों में पूरा गांव बेचैनी से भर गया। लोगों का कहना है कि पूरी कार्रवाई इतनी तेज़ थी कि उन्हें “कोई वजह समझ नहीं आई, बस आवाज़ें और धूल उड़ती दिखी।” इसी तनाव ने बाद में बड़े “Dhaunswas Protest” का रूप ले लिया।
फोरलेन पर बैठ गए महिलाएं–पुरुष, दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें
कुछ ही देर में गांव की महिलाएं, पुरुष और बच्चे महू–नीमच फोरलेन पर उतर आए और दोनों हिस्सों पर बैठकर आवाजाही रोक दी। जाम इतना भारी था कि देखते ही देखते लगभग 5 किलोमीटर तक वाहनों की लाइनें खिंच गईं। ट्रकों, बसों और निजी गाड़ियों में घंटेभर से फंसे लोग हालात को समझ भी नहीं पा रहे थे। यह पूरा जाम स्थानीय लोगों के मुताबिक “मजबूरी में किया गया कदम” था, ताकि उनकी बात प्रशासन तक पहुंचे।
समाज की नाराज़गी: ‘15 साल पुरानी धर्मशाला, लेकिन नोटिस तक सही से नहीं मिला’
मालवीय समाज के लोगों का तर्क साफ है—धर्मशाला किसी एक-दो महीने में नहीं बनी, बल्कि पंद्रह साल से खड़ी है। उनका आरोप है कि “अगर यह अतिक्रमण था, तो इतने सालों तक चुप क्यों बैठे रहे? और सुबह 5 बजे ही बुलडोज़र की क्या मजबूरी थी?” समाज के वरिष्ठ लोगों ने यह भी कहा कि यदि यह कार्रवाई नियमों के तहत थी, तो फिर अन्य विवादित निर्माणों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए। इसी असमानता की भावना ने लोगों के आक्रोश को और तेज़ किया।
प्रशासन की दलील: नाला बाधित हो रहा था, दो बार नोटिस दिया गया
अधिकारियों का पक्ष बिल्कुल अलग है। प्रशासन का कहना है कि धर्मशाला का निर्माण शासकीय नाले को ब्लॉक कर रहा था, जिस पर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। राजस्व और पंचायत विभाग की ओर से दो बार नोटिस भेजे गए, लेकिन निर्माण नहीं रुका। अधिकारियों के मुताबिक, “कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कार्रवाई की गई है।”
स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए एसडीएम, तहसीलदार, एसडीपीओ और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे, जो लगातार भीड़ से बातचीत कर माहौल शांत रखने की कोशिश करते रहे।
लंबे जाम से बिगड़ी व्यवस्था, प्रशासन हालात सामान्य करने में जुटा
फोरलेन जाम के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई वाहन चालक धूप में फंसे रहे, तो कई लोग अपने गंतव्य समय पर नहीं पहुंच सके। पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ हटाने के बिना हल संभव नहीं था।
जिले भर की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और समाज के बीच समाधान कब और कैसे निकलता है।





