सीजी भास्कर, 30 दिसंबर। डायरेक्टर आदित्य धर की रणवीर सिंह स्टारर फिल्म धुरंधर (Dhurandhar Movie) को रिलीज़ हुए तीन हफ्तों से अधिक का समय हो चुका है और इस दौरान फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त पकड़ बनाई है, बल्कि दर्शकों और सिनेमा विशेषज्ञों के बीच भी खास चर्चा बटोरी है। सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक, धुरंधर को लेकर प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन सबके बीच सबसे मुखर और दिलचस्प प्रतिक्रिया दिग्गज फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा की मानी जा रही है, जो एक सच्चे दर्शक की तरह फिल्म की खुलकर सराहना कर रहे हैं।
राम गोपाल वर्मा बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धुरंधर की तारीफ करते नहीं थक रहे। उन्होंने न सिर्फ रणवीर सिंह के अभिनय को सराहा, बल्कि डायरेक्टर आदित्य धर की कहानी कहने की शैली को भी जमकर सराहा है। रामू का मानना है कि धुरंधर (Dhurandhar Movie) ने पैन-इंडिया एक्शन फिल्मों के अब तक चले आ रहे फॉर्मूले को तोड़ दिया है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।
साउथ इंडियन सिनेमा से आगे निकली धुरंधर
हाल ही में राम गोपाल वर्मा ने एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा कि रणवीर सिंह की यह स्पाई-एक्शन फिल्म साउथ इंडियन सिनेमा की बड़ी-बड़ी एक्शन फिल्मों को पीछे छोड़ चुकी है। उन्होंने साफ कहा कि धुरंधर ने यह साबित कर दिया है कि बॉलीवुड भी बिना अतिशयोक्ति और बनावटीपन के दमदार एक्शन फिल्में बना सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले समय में इंडस्ट्री इस सफलता को किस तरह आगे बढ़ाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
राम गोपाल वर्मा के अनुसार, धुरंधर (Dhurandhar Movie) देखते समय उनका पहला विचार यही आया कि यह फिल्म मौजूदा साउथ इंडियन एक्शन ट्रेंड से अलग खड़ी है। उन्होंने कहा कि आजकल की कई फिल्मों में हीरो को जरूरत से ज्यादा बड़ा बनाकर दिखाया जाता है, बाकी किरदार सिर्फ उसकी पूजा करते नजर आते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक के जरिए दर्शकों से हीरो की आरती उतरवाई जाती है। लेकिन धुरंधर इस चलन को पूरी तरह पलट देती है।
रणवीर सिंह नहीं, कहानी है असली हीरो
रामू ने कहा कि धुरंधर में रणवीर सिंह को एक सुपरह्यूमन हीरो की तरह नहीं, बल्कि कहानी का हिस्सा बनाकर पेश किया गया है। कई दृश्यों में ऐसा लगता है कि रणवीर किरदार में घुल-मिल गए हैं और फिल्म को जबरन अपने कंधों पर नहीं उठा रहे। उन्होंने यह भी कहा कि बात सिर्फ हीरो तक सीमित नहीं है, बल्कि विलेन और बाकी सपोर्टिंग किरदार भी उतने ही मजबूत और असरदार हैं। यही संतुलन धुरंधर (Dhurandhar Movie) को अलग पहचान देता है।
पैन-इंडिया एक्शन फॉर्मूला हुआ ध्वस्त
राम गोपाल वर्मा का मानना है कि धुरंधर के बाद पैन-इंडिया फिल्मों को एक्शन के बारे में नए सिरे से सोचना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ज्यादातर बड़ी फिल्मों में एक तयशुदा ढांचा होता है, जहां एक्शन सीन लगभग एक जैसे नजर आते हैं। साउथ से आने वाली कई पैन-इंडिया फिल्मों की यही सबसे बड़ी कमजोरी रही है।
रामू के शब्दों में, धुरंधर (Dhurandhar Movie) ने इस फॉर्मूले को पूरी तरह तोड़ दिया है। फिल्म का एक्शन रियल लगता है, जमीन से जुड़ा हुआ महसूस होता है। यहां कोई हीरो हवा में उड़ता नहीं दिखता, न ही एक घूंसे में पांच लोग गिरते हैं। लड़ाइयां वैसी लगती हैं, जैसी असल जिंदगी में संभव हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि धुरंधर के बाद अगर पुराने टाइप का बनावटी एक्शन दिखाया गया, तो वह दर्शकों को मजाक जैसा लगेगा।
पारंपरिक ढांचा, लेकिन प्रस्तुति अलग
हालांकि राम गोपाल वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि धुरंधर पूरी तरह अलग किस्म की फिल्म नहीं है। इसमें वही पारंपरिक मसाला तत्व मौजूद हैं—एक मकसद के साथ आगे बढ़ता हीरो, मुसीबतें, प्रेम कहानी, मजबूत विलेन, फ्लैशबैक और बदले की भावना। उन्होंने कहा कि इस वजह से इसकी तुलना द कश्मीर फाइल्स या द केरल स्टोरी जैसी फिल्मों से नहीं की जानी चाहिए।
रामू ने यह भी जोड़ा कि धुरंधर जैसी कहानी किसी और डायरेक्टर के हाथ में होती, तो वह इसे केजीएफ-2 जैसी फिल्म भी बना सकता था। लेकिन आदित्य धर ने कहानी कहने के तरीके से इसे खास बना दिया। उन्होंने किसी एक किरदार को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं दिया, बल्कि सभी को बराबर सम्मान दिया है। यही वजह है कि धुरंधर (Dhurandhar Movie) के एक्शन सीन दर्शकों को नए और ताजगी भरे लगते हैं।
बॉक्स ऑफिस की बात करें तो धुरंधर ने 1000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है और तीसरे हफ्ते में भी इसकी कमाई थमती नजर नहीं आ रही। दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स इस बात का संकेत है कि फिल्म ने सही मायनों में पैन-इंडिया सिनेमा की दिशा बदल दी है।





