सीजी भास्कर, 06 मई : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के एड्रेस सिस्टम को पूरी तरह बदलने और इसे आधुनिक बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। शहर में चल रही डिजिटल जनगणना (Digital Census) के तहत अब बिलासपुर के हर एक मकान और प्रॉपर्टी को एक यूनिक लोकेशन ID (Unique Location ID) प्रदान की जा रही है। इस नई व्यवस्था के लागू होते ही न केवल घरों की पहचान आसान हो जाएगी, बल्कि आपातकालीन सेवाओं से लेकर ऑनलाइन डिलीवरी सिस्टम तक में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा। इस महा-अभियान के जरिए बिलासपुर अब छत्तीसगढ़ का पहला ‘फुल्ली डिजिटली मैप्ड’ (Fully Digitally Mapped) शहर बनने की ओर अग्रसर है, जिससे क्षेत्र में (Digital India) (डिजिटल इंडिया) का सपना सच हो रहा है।
मोबाइल एप से होगी ‘प्रेसिजन मैपिंग’
इस डिजिटल जनगणना के लिए तैनात कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। वे (Digital India) (डिजिटल इंडिया) के तहत एक अत्याधुनिक मोबाइल एप के जरिए जनगणना कर्मचारी हर मकान और प्रॉपर्टी के जीपीएस (GPS) अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) के आधार पर सटीक लोकेशन डेटा एप में दर्ज कर रहे हैं। बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हजारों मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को इस प्रक्रिया के तहत कवर किया जा रहा है, जिससे पूरे शहर का सटीक लोकेशन डेटा ऑनलाइन सर्वर पर उपलब्ध हो जाएगा।
1 मिनट की देरी भी नहीं होगी!
इस (Unique Location ID) व्यवस्था का सबसे बड़ा और तत्काल फायदा शहरवासियों को आपातकालीन परिस्थितियों में मिलेगा। अभी तक कई बार तंग गलियों या सटीक पते के अभाव में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड या पुलिस को मौके पर पहुंचने में देरी हो जाती थी, जो कभी-कभी जानलेवा साबित होती थी। इस डिजिटल पते के जरिए, इमरजेंसी वाहन ड्राइवर सीधे गूगल मैप्स या अन्य नेविगेशन एप्स पर सटीक लोकेशन आईडी डालकर सीधे जरूरतमंद के दरवाजे पर पहुंच सकेंगे। इससे समय की भारी बचत होगी और त्वरित सहायता सुनिश्चित हो सकेगी।
ड्रोन डिलीवरी के लिए बनेगा आधार
डिजिटल पते का फायदा न केवल प्रशासन बल्कि ई-कॉमर्स कंपनियों और उपभोक्ताओं को भी होगा। जोमैटो, स्विगी, अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट जैसी ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं के डिलीवरी बॉय को अब बार-बार कॉल कर पता पूछने या भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जीपीएस के माध्यम से वे सीधे सही स्थान तक पहुंच सकेंगे। भविष्य में जब ड्रोन डिलीवरी सेवाएं शुरू होंगी, तो उनके लिए यह (Unique Location ID) (यूनिक लोकेशन आईडी) एक बुनियादी जरूरत होगी। सटीक डिजिटल पते के बिना ड्रोन सटीक जगह पर सामान नहीं पहुंचा सकते।
शासन को मिलेगा सटीक डेटा, बेहतर होंगी बुनियादी सुविधाएं
प्रशासन को इस डिजिटल जनगणना (Digital Census) से मिले सटीक डेटा का उपयोग शहर के विकास के लिए किया जाएगा। सड़क, पानी, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं की योजना बनाने में प्रशासन को अब जनसंख्या के साथ-साथ मकानों की सटीक लोकेशन भी पता होगी, जिससे प्लानिंग बेहतर होगी। संपत्ति और किरायेदारों का रिकॉर्ड व्यवस्थित और ऑनलाइन होने से नगर निगम के कर संग्रह में पारदर्शिता बढ़ेगी, चोरी रुकेगी और विवादों में कमी आएगी।


