सीजी भास्कर, 28 जनवरी। सुबह से चर्चा थी कि इस बार धान विक्रय में कुछ अलग (Digital Farming) हुआ है। न लंबी लाइन, न इंतज़ार और न ही किसी दफ्तर के चक्कर। गांव के किसान ने जो किया, उसने बाकी किसानों के बीच नई उम्मीद जगा दी और यह साबित कर दिया कि तकनीक अब खेत तक पहुंच चुकी है।
सरगुजा जिले के ग्राम केराकछार में धान उपार्जन की प्रक्रिया ने इस सीजन एक नया भरोसा पैदा किया है। यहां के किसान ज्योति प्रकाश ने डिजिटल व्यवस्था का लाभ उठाते हुए घर बैठे ही धान विक्रय के लिए टोकन काटा और बिना किसी परेशानी के उपार्जन केंद्र तक अपनी फसल पहुंचाई।
किसान ज्योति प्रकाश ने बताया कि उनके पिता श्री गोसई के नाम पर 32 क्विंटल धान का रकबा पंजीकृत है। पहले टोकन कटवाने के लिए समिति कार्यालय में घंटों इंतज़ार करना पड़ता (Digital Farming) था, लेकिन अब ‘किसान तुहंर टोकन’ मोबाइल ऐप के जरिए यह काम कुछ ही मिनटों में पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि मोबाइल से टोकन मिलने के बाद पूरी प्रक्रिया को लेकर मन से डर भी खत्म हो गया।
धान विक्रय के लिए मेंड्रा कला उपार्जन केंद्र पहुंचे ज्योति प्रकाश ने बताया कि केंद्र पर पहुंचते ही गेट पास, नमी जांच और बारदाना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया बेहद सुचारू रही। कर्मचारियों का सहयोग, पीने के पानी की व्यवस्था और बैठने की सुविधा ने किसानों को राहत दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की पारदर्शी व्यवस्था से समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।
इसी केंद्र पर मौजूद किसान बिहारी लाल ने बताया कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर और प्रति एकड़ 21 क्विंटल की सीमा तय किए जाने से किसानों का भरोसा (Digital Farming) बढ़ा है। ज्योति प्रकाश ने बताया कि धान विक्रय से मिली राशि का उपयोग वे अब गेहूं, तिलहन और सब्जी की खेती बढ़ाने में कर रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में लगातार सुधार हो रहा है।
किसान ज्योति प्रकाश ने कहा कि डिजिटल तकनीक और उपार्जन व्यवस्था ने खेती को सम्मानजनक और लाभकारी बनाया है। सही समय पर सही मूल्य मिलने से किसान अब आत्मनिर्भर बन रहे हैं और भविष्य की खेती को लेकर नए प्रयोग करने का साहस जुटा पा रहे हैं।




