सीजी भास्कर, 16 जनवरी। खेती सिर्फ मेहनत नहीं, भरोसे का भी खेल है। जब भरोसा टूटता है तो किसान हतोत्साहित होता है, लेकिन जब व्यवस्था (Digital Paddy Procurement) साथ देती है तो वही किसान आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है। इस बार जिले के एक किसान के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने उसकी सोच और भविष्य की योजना—दोनों बदल दी।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लागू की गई पारदर्शी और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसानों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर सामने आई है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ग्राम साल्ही निवासी किसान राम बरन सिंह मरकाम हैं, जिन्होंने चैनपुर उपार्जन केंद्र में अपनी उपज का पूरी तरह तकनीक आधारित प्रक्रिया के जरिए 51.20 क्विंटल धान सफलतापूर्वक विक्रय किया।
धान विक्रय के दौरान उपार्जन केंद्र पर किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया। डिजिटल तौल (Digital Paddy Procurement) कांटा, बैठने की समुचित व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और छायादार स्थान जैसी सुविधाओं ने किसानों को सम्मानजनक अनुभव दिया। पूरी प्रक्रिया में किसी तरह की असमंजस या अनिश्चितता नहीं रही।
राम बरन सिंह मरकाम बताते हैं कि पहले धान बेचने के दौरान लंबा इंतजार, भुगतान की चिंता और अव्यवस्था आम बात थी। लेकिन इस बार समयबद्ध तौल और सीधा भुगतान मिलने से वे निश्चिंत रहे। अब वे अगली फसल की तैयारी, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों की योजना बिना किसी दबाव के बना पा रहे हैं।
भरोसे से आत्मनिर्भरता की ओर
यह कहानी सिर्फ एक किसान की नहीं, बल्कि जिले में लागू किसान-हितैषी नीतियों की जमीनी सफलता (Digital Paddy Procurement) को दर्शाती है। डिजिटल व्यवस्था ने न केवल पारदर्शिता बढ़ाई है, बल्कि किसानों को यह भरोसा भी दिलाया है कि उनकी मेहनत का पूरा मूल्य उन्हें समय पर मिलेगा।
राम बरन सिंह मरकाम की यह अनुभव-कथा अब अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है, जो पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।


