सीजी भास्कर, 29 दिसंबर। प्रदेश में धान उपार्जन केंद्रों पर लागू की गई पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था (Digital Token System) किसानों के लिए राहत और भरोसे का माध्यम बन रही है। डिजिटल टोकन प्रणाली के लागू होने से धान विक्रय की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल, तेज और सुव्यवस्थित हो गई है। इस नई व्यवस्था से किसानों को न केवल समय और श्रम की बचत हो रही है, बल्कि अनावश्यक दौड़-भाग और खर्च से भी राहत मिली है।
धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया में डिजिटल टोकन प्रणाली (Digital Token System) को केंद्र में रखा गया है, जिससे किसानों को घर बैठे टोकन प्राप्त करने की सुविधा मिल रही है। अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मुडेसा निवासी सीमांत किसान ज्ञानेश्वर प्रसाद वैष्णव ने इस व्यवस्था को किसान-हितैषी और पारदर्शी बताते हुए इसकी सराहना की है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष उनकी धान की फसल अच्छी रही और कुल 45.60 क्विंटल धान के विक्रय के लिए उन्होंने किसान तुंहर टोकन ऐप के माध्यम से घर से ही टोकन काटा।
ज्ञानेश्वर वैष्णव के अनुसार डिजिटल व्यवस्था के कारण उन्हें टोकन कटवाने के लिए बार-बार उपार्जन केंद्र के चक्कर नहीं लगाने पड़े। निर्धारित तिथि पर उपार्जन केंद्र पहुंचते ही उन्हें गेट पास जारी किया गया, नमी परीक्षण किया गया और तत्काल बारदाना उपलब्ध कराया गया। पूरी धान विक्रय प्रक्रिया सुचारू और व्यवस्थित रही, जिससे किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि उपार्जन केंद्रों में किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था और कर्मचारियों के सहयोगात्मक व्यवहार से किसानों को सहज वातावरण मिला। डिजिटल रिकॉर्डिंग और समयबद्ध प्रक्रिया के कारण पारदर्शिता बनी हुई है, जिससे किसानों का भरोसा व्यवस्था पर और मजबूत हुआ है।
प्रदेश सरकार द्वारा धान का 3100 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य दिए जाने से किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है। प्राप्त राशि का उपयोग किसान गेहूं, तिलहन, सब्जी और अन्य फसलों की खेती में कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। किसानों का कहना है कि डिजिटल टोकन प्रणाली (Digital Token System) ने धान खरीदी को सरल बनाकर खेती को लाभकारी दिशा दी है।
सीमांत किसान ज्ञानेश्वर प्रसाद वैष्णव ने धान खरीदी की वर्तमान पारदर्शी, डिजिटल और किसान हितैषी व्यवस्था पर संतोष जताते हुए कहा कि इस प्रणाली से किसान खुश और संतुष्ट हैं, और भविष्य में इससे कृषि व्यवस्था और मजबूत होगी।


