(Dolphin School Scam) से जुड़े मुख्य आरोपी राजेश शर्मा को अदालत से विशेष अनुमति मिलने के बाद आज अपनी पत्नी उमा शर्मा के अंतिम संस्कार में शामिल होने का मौका मिला। राजधानी के देवेंद्र नगर स्थित मुक्तिधाम में जब उन्होंने पत्नी को अंतिम विदाई दी, तो वहां का माहौल बेहद गमगीन था। चिता के पास मौजूद गिनती के लोग, जेल कर्मियों की निगरानी और मीडिया की मौजूदगी… यही सब कुछ उस पल का गवाह बने।
नामचीन शख्सियत से अकेलेपन तक का सफर
राजेश शर्मा कभी (Dolphin International School) के संस्थापक के रूप में शिक्षा जगत में बड़ा नाम माने जाते थे। कहा जाता है कि 2005 से 2010 के बीच उन्होंने स्कूलों की ऐसी श्रृंखला खड़ी की, जिसने राजधानी से लेकर प्रदेश के कई हिस्सों में पहचान बनाई। लेकिन हालात इस कदर बदले कि वही शख्स आज जेल से बाहर सिर्फ पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए निकला।
आरोप और भागदौड़ का काला अध्याय
राजेश शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने अभिभावकों से वर्षों की फीस वसूली, लेकिन अचानक स्कूलों को बंद कर दिया। (Dolphin School Scam) के इस प्रकरण से करोड़ों का नुकसान हुआ। वसूली का दबाव बढ़ने और कानूनी शिकंजा कसने के बाद 2011 में वे राजधानी छोड़कर फरार हो गए। करीब छह साल की फरारी के बाद 2017 में उन्हें और उनकी पत्नी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया और रायपुर लाया गया। तब से दोनों जेल में ही थे।
पत्नी के इलाज पर उठे सवाल
अंतिम संस्कार के दौरान राजेश शर्मा बेहद टूटे हुए दिखे। उन्होंने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया कि अदालत से मंजूरी मिलने के बावजूद उनकी पत्नी को पर्याप्त इलाज नहीं दिया गया। इस दर्दनाक आरोप ने पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया।
कभी थे शिक्षा जगत के बड़े नाम
शुरुआत में सेंट जेवियर स्कूल में शिक्षक रहे राजेश शर्मा ने अपने विजन के दम पर (Dolphin International School) की नींव रखी थी। उन्होंने स्कूल की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए नामचीन कलाकारों को भी ब्रांड एम्बेसडर बनाया था। देखते ही देखते उन्होंने लगभग 40 स्कूलों की चेन खड़ी कर दी। लेकिन वक्त ने करवट बदली और वही व्यक्ति अब गिनती के लोगों के बीच चुपचाप अपनी पत्नी को विदा कर रहा था।
नतीजे की प्रतीक्षा में पूरा मामला
(Dolphin School Scam) से जुड़ा यह पूरा मामला अब भी अदालत में विचाराधीन है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए फैसला कब और किस दिशा में जाएगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।



