सीजी भास्कर, 30 दिसंबर। डोंगरगढ़–मोहारा पुलिस चौकी क्षेत्र के ग्राम लोझरी के जंगल में नीम की पत्तियां तोड़ने गए एक ग्रामीण पर (Dongargarh Leopard Attack) तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में केज़उ राम कंवर गंभीर रूप से घायल हो गया। तेंदुए के पंजों से उसके सिर पर गहरे घाव आए, जिससे वह मौके पर ही लहूलुहान हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगढ़ ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार घायल की स्थिति नाजुक बनी हुई है।
पहली घटना नहीं, लगातार बढ़ रहा खतरा
डोंगरगढ़ वन परिक्षेत्र में यह कोई पहली घटना (Dongargarh Leopard Attack) नहीं है। बीते कुछ समय से क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियां लगातार देखी जा रही हैं। कुछ माह पूर्व इसी इलाके में एक तेंदुए का शव भी संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। इसके बावजूद जंगल से सटे गांवों में तेंदुए की मौजूदगी कम नहीं हुई, बल्कि खतरा और बढ़ता चला गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक लोझरी, मोहारा और आसपास के गांवों में शाम ढलते ही तेंदुए की आवाजाही महसूस की जाती है। मवेशियों पर हमले की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन अब इंसानों पर हमला होना गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग (Dongargarh Leopard Attack) पर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए की सूचना कई बार दी गई, लेकिन न तो स्थायी निगरानी की व्यवस्था की गई और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए। जंगल क्षेत्र में चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए गए और नियमित गश्त भी नहीं हो रही थी, जिसका खामियाजा अब ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
मौके पर पहुंची पुलिस और वन विभाग की टीम
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में भोजन की कमी, मानव गतिविधियों में वृद्धि और अवैध आवाजाही के कारण तेंदुए आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे मानव–वन्यजीव संघर्ष लगातार खतरनाक रूप ले रहा है।
निगरानी बढ़ाने की तैयारी, ग्रामीणों में डर
फिलहाल क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने, ट्रैप कैमरे लगाने और ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की जा रही है। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक तेंदुए की गतिविधियों पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं होता, तब तक जंगल में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए और रात्रिकालीन गश्त अनिवार्य की जाए।






