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Drinking Water Reservoir : रायपुर की प्यास बुझाने की बड़ी तैयारी, गजराज बांध बनेगा पेयजल भंडार

By Newsdesk Admin
18/06/2026
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Drinking Water Reservoir
Drinking Water Reservoir

सीजी भास्कर, 18 जून :  राजधानी रायपुर की बढ़ती आबादी और भविष्य की जल जरूरतों को देखते हुए कमल विहार स्थित गजराज बांध (Drinking Water Reservoir)  को पेयजल भंडार के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू होने जा रहा है। करीब 230 एकड़ क्षेत्र में फैले इस जलाशय को शहर की दीर्घकालिक जल सुरक्षा का आधार माना जा रहा है। हालांकि अतिक्रमण, गंदगी और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी चुनौतियां इस परियोजना की राह में बड़ी बाधा बनकर खड़ी हैं। गजराज बांध को पेयजल भंडार के रूप में विकसित करने के लिए अब नगर निगम, सिंचाई विभाग और रायपुर विकास प्राधिकरण संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

Contents
  • राज्यपाल के निर्देश के बाद तेज हुई कवायद
  • तैयार होगी विस्तृत विकास कार्ययोजना
  • विशेषज्ञों ने बताई सफलता की शर्तें
  • अतिक्रमण और गंदगी बनी सबसे बड़ी चुनौती
  • भविष्य की जल सुरक्षा पर टिकी उम्मीदें

राज्यपाल के निर्देश के बाद तेज हुई कवायद

हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में राज्यपाल ने गजराज बांध की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए इसे भविष्य के महत्वपूर्ण जल स्रोत के रूप में विकसित करने पर जोर दिया था। इसके बाद संबंधित विभाग सक्रिय हो गए हैं और जलाशय के संरक्षण, पुनर्विकास तथा पेयजल उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि यदि आवश्यक सुधार और संरचनात्मक कार्य समय पर पूरे कर लिए जाएं तो यह जलाशय राजधानी की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

तैयार होगी विस्तृत विकास कार्ययोजना

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार सबसे पहले गजराज बांध के कैचमेंट एरिया, जलभराव क्षमता, जल गुणवत्ता और मौजूदा स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर व्यापक विकास योजना तैयार की जाएगी।

योजना में आधुनिक जल शोधन संयंत्र स्थापित करने, आसपास के जल स्रोतों को आपस में जोड़ने तथा वर्षभर पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है। पेयजल परियोजना (Drinking Water Reservoir) को सफल बनाने के लिए तीनों विभागों के बीच समन्वय को प्राथमिकता दी जाएगी।

विशेषज्ञों ने बताई सफलता की शर्तें

भू-जल और जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जलाशय को सीधे पेयजल स्रोत के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। इसके लिए वैज्ञानिक जल शोधन, नियमित गुणवत्ता परीक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की मजबूत व्यवस्था आवश्यक होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार डी-सिल्टिंग, तट संरक्षण, जल संरक्षण और जल गुणवत्ता प्रबंधन जैसे कार्य प्रभावी ढंग से किए जाएं तो गजराज बांध आने वाले वर्षों में रायपुर के लिए स्थायी जल स्रोत बन सकता है।

अतिक्रमण और गंदगी बनी सबसे बड़ी चुनौती

वर्तमान में गजराज बांध अतिक्रमण, ठोस कचरे और रखरखाव की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। वर्षों से पर्याप्त संरक्षण नहीं मिलने के कारण इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई है।

अधिकारियों का मानना है कि पेयजल भंडार के रूप में विकसित करने से पहले जलाशय क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करना, गाद निकालना और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू करना जरूरी होगा।

भविष्य की जल सुरक्षा पर टिकी उम्मीदें

महापौर मीनल चौबे ने कहा है कि राज्यपाल के निर्देशों के अनुरूप सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उद्देश्य यह है कि आने वाले वर्षों में रायपुरवासियों को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।

यदि यह परियोजना सफल होती है तो गजराज बांध राजधानी की जल सुरक्षा को नई मजबूती देने के साथ-साथ भविष्य की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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