सीजी भास्कर, 29 जनवरी | Durg Burn Murder Case : घरेलू विवाद की आग ने एक महिला की जान ले ली और 12 साल बाद उसी आग में आरोपी पति को कानून ने घेर लिया। दुर्ग जिले के नेवई थाना क्षेत्र में पत्नी को जिंदा जलाने के मामले में सत्र न्यायालय ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
पहली पत्नी को लेकर शुरू हुआ था विवाद
अभियोजन के अनुसार, आरोपी घांसू उर्फ झांसूराम अपनी पहली पत्नी सुमन का पक्ष लेता था, जिसे लेकर उसकी दूसरी पत्नी ममता से अक्सर झगड़ा होता था। यही पारिवारिक तनाव धीरे-धीरे हिंसक रूप लेता चला गया।
15 जनवरी 2012 की वह रात
घटना 15 जनवरी 2012 की रात करीब 9:30 बजे की है। शराब के नशे में घर लौटे आरोपी ने पत्नी ममता से गाली-गलौज शुरू की और मारपीट की। विवाद बढ़ने पर उसने मिट्टी का तेल ममता पर उड़ेल दिया और जान से मारने की धमकी दी।
आग की लपटों में झुलसता भरोसा
अभियोजन ने बताया कि भय और तनाव की हालत में ममता ने खुद को आग लगा ली, लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं हुई। आरोप है कि आरोपी ने जलती हुई पत्नी पर दोबारा केरोसिन डाल दिया, जिससे आग और भड़क गई।
मरणासन्न बयान बना सबसे बड़ा सबूत
गंभीर रूप से झुलसी ममता को दुर्ग के सरकारी अस्पताल के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया। अगले दिन कार्यपालिक मजिस्ट्रेट ने उसका मरणासन्न कथन दर्ज किया, जिसमें ममता ने स्पष्ट रूप से पति को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया।
इलाज के दौरान मौत, केस बदला हत्या में
पहले पुलिस ने मामला हत्या के प्रयास में दर्ज किया था, लेकिन 22 जनवरी 2012 को ममता की मौत हो गई। इसके बाद केस धारा 302 (हत्या) में तब्दील कर दिया गया। मौके से जले कपड़े और मिट्टी तेल की बोतल जब्त की गई।
12 साल फरारी, 2024 में गिरफ्तारी
घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। वर्ष 2014 में उसे फरार घोषित किया गया। लंबी तलाश के बाद 17 नवंबर 2024 को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
कोर्ट का फैसला: उम्रकैद लेकिन मृत्युदंड नहीं
सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने सभी साक्ष्य, गवाहों और मरणासन्न बयान के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि अपराध अत्यंत गंभीर है, लेकिन इसे “विरल से विरलतम” की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास, ₹1000 अर्थदंड और अर्थदंड न देने पर 6 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई।




