सीजी भास्कर, 10 दिसंबर। एक संसदीय समिति ने चेतावनी दी है कि उच्च शिक्षा की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि शिक्षा ऋण की उपलब्धता पहले की तुलना में कम होती जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा महंगी होने से निम्न आय वर्ग के छात्रों के लिए कॉलेज और प्रोफेशनल कोर्स तक पहुंच कठिन हो रही है (Education Loan Accessibility Crisis)।
समिति ने सिफारिश दी है कि ऋण आवेदनों को कम या अस्वीकार करने की प्रवृत्ति को रोका जाना चाहिए, ताकि अधिकाधिक छात्रों को पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिल सके।
यह रिपोर्ट कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति द्वारा संसद में प्रस्तुत की गई। समिति ने कहा कि सरकार द्वारा प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी पोर्टल के प्रचार के बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों और वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों में शिक्षा लोन योजनाओं की जानकारी अभी भी सीमित है। इसके कारण कई योग्य छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण करने से पहले ही पीछे रह जाते हैं ।
रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण भारत — विशेष रूप से तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र — में शिक्षा ऋण प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या अधिक है, जबकि उत्तर भारत और ग्रामीण राज्यों में इस सुविधा का लाभ अपेक्षाकृत कम लोग उठा पा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2025 के बीच सक्रिय छात्र ऋण अकाउंट 23.36 लाख से घटकर 20.63 लाख रह गए, जबकि कुल ऋण राशि 52,327 करोड़ से बढ़कर 1,37,474 करोड़ रुपये हो गई।
इसका अर्थ है कि ऋण कम छात्रों को तो मिल रहा है, लेकिन बड़ी रकम उन्हीं चुनिंदा आवेदकों तक सीमित रह गई है (Education Loan Accessibility Crisis)। समिति ने सुझाव दिया कि उच्च शिक्षा विभाग व वित्तीय सेवा विभाग मिलकर इस अंतर को समाप्त करें और विशेष रूप से बीपीएल परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता दें।
नैक की मान्यता प्रक्रिया लंबी, सुधार की जरूरत
रिपोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। समिति का कहना है कि नैक (NAAC) की पुनर्मान्यता प्रणाली जटिल, धीमी और बोझिल है, जिससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को गुणवत्ता प्रमाणन में अनावश्यक समय लग रहा है।
समिति ने सुझाव दिया कि नैक में तेज, पारदर्शी और आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली लागू की जाए और उसकी विश्वसनीयता को शीघ्र बहाल किया जाए। साथ ही समिति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) में निर्णयकारी नेतृत्व की कमी पर भी चिंता जताते हुए आयोग के लिए जल्द से जल्द अध्यक्ष नियुक्त करने की अनुशंसा की है।





