सीजी भास्कर, 21 दिसंबर। इंटरनेट मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में अंडों को लेकर फैलाए जा रहे कैंसर के खतरे के दावों पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि देशभर में बिकने वाले अंडे पूरी तरह सुरक्षित हैं और इन्हें खाने से कैंसर होने का दावा भ्रामक एवं वैज्ञानिक आधारहीन है। एफएसएसएआइ ने कहा कि अंडों को लेकर कैंसर का खतरा बढ़ने की बात (Egg Cancer Claim) पूरी तरह निराधार है और इससे आम जनता में अनावश्यक डर फैलाया जा रहा है।
एफएसएसएआइ के अनुसार हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया कि अंडों में नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स जैसे कैंसरकारक तत्व पाए गए हैं। इस पर सफाई देते हुए खाद्य नियामक ने कहा कि नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स के लिए 1.0 माइक्रोग्राम प्रति किलोग्राम की अधिकतम सीमा निर्धारित है।
यदि इस सीमा के भीतर किसी नमूने में अंश मात्र अवशेष पाए जाते हैं, तो इसे न तो खाद्य सुरक्षा का उल्लंघन माना जाता है और न ही यह किसी प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम का संकेत देता है। अंडों को लेकर फैलाया गया कैंसर का डर (Egg Cancer Claim) वैज्ञानिक तथ्यों से मेल नहीं खाता।
एफएसएसएआइ ने यह भी स्पष्ट किया कि नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स का उपयोग पोल्ट्री और अंडा उत्पादन की पूरी शृंखला में सख्ती से प्रतिबंधित है। भारत का खाद्य नियामक ढांचा इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे देशों में भी खाद्य उत्पादन करने वाले पशुओं में नाइट्रोफ्यूरान के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है। भारत में पोल्ट्री फार्म और अंडा उत्पादन इकाइयों की नियमित जांच और निगरानी की जाती है, ताकि उपभोक्ताओं की सेहत से कोई समझौता न हो।
एफएसएसएआइ ने आम जनता के बीच फैल रहे भ्रम को खारिज करते हुए कहा कि किसी एक प्रयोगशाला के सीमित या अलग-थलग परीक्षण निष्कर्षों को पूरे देश की अंडा आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से गलत है।
किसी विशेष ब्रांड या बैच से जुड़े परीक्षण परिणाम यह साबित नहीं करते कि देशभर में बिकने वाले सभी अंडे असुरक्षित हैं। अंडों से कैंसर होने के दावे (Egg Cancer Claim) को इस तरह पेश करना जनता को गुमराह करने जैसा है।
खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे केवल सत्यापित वैज्ञानिक साक्ष्यों और आधिकारिक संस्थानों की जानकारी पर ही भरोसा करें। अफवाहों और अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर अपने भोजन को लेकर निर्णय लेना उचित नहीं है।
एफएसएसएआइ ने दोहराया कि अंडा संतुलित आहार का एक महत्वपूर्ण और सुरक्षित हिस्सा है, जिसमें उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन, आवश्यक विटामिन और खनिज तत्व मौजूद होते हैं।
वैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला देते हुए एफएसएसएआइ ने कहा कि नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स के अंश मिलने और अंडा खाने से मनुष्य में कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों के बीच कोई स्थापित संबंध नहीं पाया गया है।
किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी ने सामान्य रूप से अंडा खाने को कैंसर के बढ़ते जोखिम से नहीं जोड़ा है। इसलिए अंडों को लेकर फैलाया जा रहा डर (Egg Cancer Claim) पूरी तरह भ्रामक है और इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है।






