सीजी भास्कर, 21 मार्च। रमजान के पूरे महीने इबादत और रोज़ों के बाद शनिवार (Eid Namaz Timing) को ईद-उल-फितर का त्योहार देशभर में पूरे उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है। सुबह की पहली रोशनी के साथ ही शहरों और कस्बों में रौनक बढ़ गई-हर तरफ नए कपड़ों में सजे लोग, मस्जिदों की ओर जाते कदम और दिलों में खुशी का अलग ही एहसास देखने को मिला।
ईदगाहों में उमड़ी भीड़, गूंजे तकबीर के स्वर
सुबह-सुबह लोग नहाकर, साफ-सुथरे या नए कपड़े पहनकर और इत्र लगाकर ईद की नमाज अदा करने के लिए ईदगाह और मस्जिदों की ओर पहुंचे। नमाज के दौरान मुल्क में अमन-चैन, तरक्की और इंसानियत की दुआएं मांगी गईं।
नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर “ईद मुबारक” कहा और रिश्तों की गर्माहट को फिर से ताजा (Eid Namaz Timing) किया। कई जगहों पर परंपरा के मुताबिक नमाज के बाद अलग रास्ते से घर लौटने की रस्म भी निभाई गई।
फितरा: खुशियों में सबको शामिल करने की पहल
ईद की नमाज से पहले जकात-उल-फितर अदा करना इस त्योहार का अहम हिस्सा माना जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज का हर जरूरतमंद व्यक्ति भी इस खुशी में शामिल हो सके। लोग अपनी क्षमता के अनुसार फितरा देकर जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाते हैं, ताकि कोई भी परिवार ईद की खुशी से वंचित न रहे।
मिठास और मोहब्बत का त्योहार
ईद-उल-फितर को ‘मीठी ईद’ भी कहा जाता है। इस दिन घरों में सेवइयां, खीर और तरह-तरह के पकवान बनते हैं, जिन्हें परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ साझा किया जाता है। यह त्योहार सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का भी प्रतीक है-जहां लोग पुराने गिले-शिकवे भूलकर नए रिश्तों की शुरुआत करते हैं।
चांद से तय होता है त्योहार का दिन
ईद-उल-फितर इस्लामी कैलेंडर के शव्वाल महीने की पहली तारीख को मनाई (Eid Namaz Timing) जाती है और इसकी शुरुआत चांद दिखने के साथ होती है। यही वजह है कि अलग-अलग देशों में यह त्योहार एक-दो दिन के अंतर से मनाया जाता है। इतिहास के अनुसार, इस पर्व की शुरुआत पैगंबर हजरत मोहम्मद द्वारा मदीना में की गई थी, जब पहली बार रमजान के रोजे पूरे किए गए थे।


