सीजी भास्कर, 10 अक्टूबर। चुनाव प्रचार के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ एआइ (AI) और डीपफेक तकनीक (Election Commission AI Guidelines) के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को सख्त चेतावनी जारी की है। आयोग ने कहा है कि चुनाव प्रचार में किसी भी प्रकार से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) या डीपफेक वीडियो का दुरुपयोग किया गया तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा। यह निर्देश ऐसे समय पर जारी किए गए हैं जब बिहार विधानसभा चुनाव के साथ-साथ देश के सात राज्यों में उपचुनाव चल रहे हैं।
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि वे प्रचार के दौरान AI-जनरेटेड कंटेंट (Election Commission AI Guidelines) का उपयोग करते समय इसकी स्पष्ट जानकारी दें, ताकि मतदाताओं को भ्रमित न किया जा सके। आयोग ने साफ कहा है कि यदि किसी प्रचार सामग्री में एआइ या डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, तो उस पर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए कि “यह एआइ-जनरेटेड कंटेंट है।” ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट (Election Commission AI Guidelines) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
आयोग ने अपने दिशा-निर्देशों में यह भी कहा है कि राजनीतिक दल प्रचार के दौरान अपने प्रतिद्वंद्वियों पर केवल नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर हमला करें, न कि व्यक्तिगत या पारिवारिक मामलों को लेकर। किसी भी प्रकार की तथ्यों में तोड़-मरोड़ (Election Commission AI Guidelines) कर प्रस्तुत करने या निजी जीवन पर हमला करने को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, आयोग सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी नजर रखेगा, ताकि चुनावी माहौल को दूषित होने से रोका जा सके। जिन व्यक्तियों या संगठनों को एआइ या डीपफेक के दुरुपयोग में शामिल पाया जाएगा, उन्हें चुनाव प्रचार से रोकने के साथ-साथ उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।
आयोग ने सभी दलों से अपील की है कि वे अपने डिजिटल प्रचार अभियानों में पारदर्शिता बनाए रखें और मतदाताओं के साथ विश्वास कायम करें। साथ ही, यह भी कहा गया है कि स्वस्थ और तथ्य-आधारित राजनीतिक विमर्श ही लोकतंत्र की मजबूती की पहचान है, न कि भ्रामक तकनीक या फर्जी वीडियो के सहारे जीतने की कोशिश।


