सीजी भास्कर, 22 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिजली चोरी के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी की आपराधिक अपील को खारिज (Electricity Theft Case) कर दिया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने कहा कि जांच के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजी साक्ष्य और जब्ती की प्रक्रिया पूरी तरह विश्वसनीय है, जिससे आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप स्पष्ट रूप से सिद्ध होते हैं।
मामले के अनुसार, 28 जनवरी 2015 को छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की सतर्कता टीम ने कवर्धा स्थित एक परिसर का निरीक्षण किया था। जांच में पाया गया कि आरोपी द्वारा बिजली मीटर के पीछे सर्विस वायर से छेड़छाड़ कर अतिरिक्त तार और एमसीबी लगाकर मीटर को बायपास किया गया था। इस व्यवस्था के जरिए बिजली का उपयोग तो किया जा रहा था, लेकिन उसकी वास्तविक खपत मीटर में दर्ज नहीं हो रही थी। निरीक्षण के दौरान कुल 2840 वॉट का घरेलू लोड पाया गया और मौके से संबंधित सामग्री जब्त कर पंचनामा तैयार किया गया।
जांच के आधार पर बिजली विभाग ने आरोपी पर 1,18,925 रुपये का अस्थायी आकलन लगाया और नियमानुसार निर्धारित समय के भीतर राशि जमा करने या आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया गया। हालांकि आरोपी द्वारा न तो कोई आपत्ति प्रस्तुत की गई और न ही राशि जमा की गई, जिसके बाद मामला विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
इस प्रकरण में विशेष न्यायाधीश (विद्युत अधिनियम), कबीरधाम ने 22 नवंबर 2018 को आरोपी को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 135(1)(ए) के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने आरोपी को न्यायालय उठने तक की सजा और 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित (Electricity Theft Case) किया था। साथ ही जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में एक माह के साधारण कारावास का प्रावधान भी रखा गया था।
अपील के दौरान आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है और गवाहों के बयानों में विरोधाभास है। वहीं, हाई कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों, जब्ती प्रक्रिया और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद पाया कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और साक्ष्य मजबूत हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा उचित और परिस्थितियों के अनुरूप है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
इसी के साथ हाई कोर्ट ने आरोपी की आपराधिक अपील को खारिज (Electricity Theft Case) करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। यह फैसला बिजली चोरी जैसे मामलों में सख्त रुख और साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करता है।






