सीजी भास्कर, 10 जनवरी। शाम के वक्त हाथी प्रभावित क्षेत्र (Elephant Attack Jashpur) में निकलना दो ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो सकता था। शोक पत्र बांटकर बाइक से घर लौट रहे युवकों के सामने अचानक हाथियों का झुंड आ गया। जान बचाने के लिए एक युवक पेड़ पर चढ़ गया और गजराजों के बीच करीब एक घंटे तक अंधेरे में लटका रहा। बाद में वन विभाग और ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। मामला तपकरा वन परिक्षेत्र (Tapkara Forest Elephant Movement) के पतेबहाल गांव का है।
जशपुर जिले के औरिजोर निवासी बबलू नाग (32) ने बताया कि वह अपने साथी राजकुमार नाग (22) के साथ पतेबहाल गांव शोक पत्र बांटने गया था। शाम ढलने के बाद दोनों बाइक से वापस लौट रहे थे। जैसे ही वे महुआ जंगल क्षेत्र (Elephant Corridor Jashpur) में पहुंचे, सामने से चार हाथियों का दल निकल आया।
हाथियों को सामने देखकर दोनों युवक घबरा गए। अफरातफरी में बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। पीछे बैठे राजकुमार गांव की ओर भाग निकले, जबकि बबलू ने जान बचाने के लिए झाड़ियों की ओर दौड़ लगाई और पास के एक पेड़ पर चढ़ गया। हाथियों का दल चारों ओर घूमता रहा और बबलू करीब एक घंटे तक पेड़ पर ही छिपा रहा (Human Elephant Conflict Jashpur)।
कुछ देर बाद हाथी जंगल की ओर बढ़ गए। बबलू पेड़ से नीचे तो उतर आया, लेकिन अंधेरा और डर के कारण रास्ता भटक गया। इसी बीच जान बचाकर गांव पहुंचे राजकुमार ने ग्रामीणों को पूरी घटना बताई और मदद की गुहार लगाई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
बिट गार्ड नंदकुमार यादव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। सायरन बजाकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा गया (Forest Department Elephant Alert) और अंधेरे में फंसे बबलू की तलाश शुरू की गई। बाद में मोबाइल संपर्क के जरिए उसका लोकेशन पता कर उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया।
ऐसे बची ग्रामीण की जान
बबलू ने बताया कि बाइक गिरने के बाद भी इंजन और हेडलाइट चालू थे। इसी वजह से हाथी सीधे हमला नहीं कर पाए। दल में एक छोटा और तीन बड़े हाथी शामिल थे। बाइक की रोशनी और आवाज ने उसे जान बचाने का मौका दे दिया (Elephant Encounter Survival)।
विशेषज्ञ की सलाह
हाथी विशेषज्ञ प्रभात दुबे के अनुसार, हाथी विचरण क्षेत्र (Elephant Movement Zone) में शाम चार बजे के बाद आवाजाही बेहद खतरनाक हो जाती है। इस समय हाथी जंगल से निकलकर सड़कों और गांवों की ओर बढ़ते हैं। लोगों को जंगल के अंदरूनी रास्तों से बचना चाहिए।
22 दिनों से 37 हाथियों का डेरा
तपकरा रेंज (Tapkara Elephant Zone) में 37 हाथियों का बड़ा दल पिछले 22 दिनों से डेरा जमाए हुए है। यह दल टिकलीपारा के सतपुरिया और पतेबहाल के महुआ जंगल क्षेत्र में लगातार घूम रहा है। वन विभाग ने लोगों से हाथियों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड की सीमा से लगा यह इलाका सालभर हाथियों की गतिविधियों के लिए संवेदनशील बना रहता है (Elephant Prone Area Chhattisgarh)।


