सीजी भास्कर 29 जनवरी Elephant Calf Death in Raigarh : रायगढ़ जिले में जंगली हाथियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला घरघोड़ा विकासखंड के ग्राम कया के जंगल क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक हाथी के शावक की दर्दनाक मौत हो गई। शावक का शव दो बड़ी चट्टानों के बीच फंसा हुआ मिला, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
चट्टानों के बीच फंसकर गई जान, रातभर गूंजती रही चिंघाड़
जानकारी के अनुसार हाथी का यह शावक अचानक ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके में चट्टानों के बीच फंस गया। शावक के गिरते ही उसके साथ मौजूद हाथियों का दल पूरी रात जंगल में चिंघाड़ता रहा। बताया जा रहा है कि हाथियों ने बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश भी की, लेकिन भारी चट्टानों के कारण वे सफल नहीं हो सके।
ग्रामीणों की सूचना पर सक्रिय हुआ वन अमला
27 जनवरी की शाम को स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग को जंगल क्षेत्र में एक हाथी के बच्चे के मृत पड़े होने की सूचना दी। सूचना मिलते ही वन अमला मौके के लिए रवाना हुआ, लेकिन रात होने, इलाका दुर्गम होने और आसपास हाथियों की मौजूदगी के कारण टीम तत्काल घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकी।
सुबह पहुंची टीम, नर शावक होने की पुष्टि
28 जनवरी की सुबह वन विभाग की टीम आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 1310 पहुंची। निरीक्षण के दौरान मृत हाथी शावक के नर होने की पुष्टि की गई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मौके पर ही पोस्टमार्टम किया गया और वन नियमों के अनुसार शव का दाह संस्कार किया गया।
शावक की मौत के बाद आक्रामक हुआ हाथियों का दल
वन अधिकारियों के अनुसार शावक की मौत के बाद हाथियों का झुंड तनावग्रस्त और आक्रामक व्यवहार कर रहा है। इसी को देखते हुए आसपास के गांवों के ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में न जाने और किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग को देने की अपील की गई है।
बार-बार हो रही घटनाओं पर उठने लगे सवाल
रायगढ़ और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही हाथियों की मौतें वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक गलियारे, खनन क्षेत्र और जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप ऐसी घटनाओं की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं।




