सीजी भास्कर, 31 अक्टूबर। प्रदेश में बहुचर्चित डीएमएफ (District Mineral Foundation) घोटाले में ईओडब्ल्यू-एसीबी (EOW-ACB Investigation) की कार्रवाई अब और तेज हो गई है। बुधवार को रायपुर, दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव और धमतरी में 14 स्थानों पर हुई संयुक्त छापेमारी के बाद जांच एजेंसी के निशाने पर अब आधा दर्जन से अधिक सप्लायर आ गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान खनन कारोबारियों, सप्लायरों और बिचौलियों के घरों व दफ्तरों से बड़ी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह साफ हुआ है कि विभिन्न जिलों के तत्कालीन अफसरों ने कुछ सप्लायरों (EOW-ACB Investigation) के साथ मिलकर डीएमएफ के करोड़ों रुपये के फंड का दुरुपयोग किया। बिना किसी सामग्री की आपूर्ति किए फर्जी बिलों के जरिए भुगतान कराया गया। इसके बदले में प्रशासनिक अधिकारियों को मोटी कमीशन दी गई।
जांच टीम को कई अहम सबूत मिले हैं, जिनमें फर्जी बिलिंग, वाउचर, जीएसटी रिटर्न और ईमेल संवाद शामिल हैं। जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में कई सप्लायरों और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर शिकंजा कस सकता है।
जानकारी के अनुसार, ईडी (Enforcement Directorate) भी इस मामले की समानांतर जांच कर रही है। एजेंसी को ऐसे कई टेंडरों और भुगतान की जानकारी मिली है जिनकी मंजूरी कलेक्टर स्तर से दी गई थी। चूंकि डीएमएफ फंड की निगरानी जिला कलेक्टर करते हैं, इसलिए कुछ पूर्व कलेक्टरों की भूमिका भी अब जांच के दायरे में आ गई है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है, और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे संभव हैं। एजेंसी ने कुछ प्रमुख सप्लायरों (EOW-ACB Investigation) के बैंक खातों और संपत्तियों का भी ब्यौरा मांगा है। माना जा रहा है कि अगले चरण में नोटिस जारी किए जा सकते हैं।


