सीजी भास्कर 27 फ़रवरी राजधानी रायपुर में आज सौ से अधिक पूर्व नक्सली विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुँचे। जिन लोगों ने कभी संविधान को नकारा था, वही अब लोकतंत्र के मंदिर में बैठकर विधायी प्रक्रिया को समझेंगे। यह पहल (Ex-Naxalites Assembly Visit) के तहत पुनर्वास नीति का एक व्यावहारिक और मानवीय चेहरा सामने लाती है, जहाँ बदलाव को अवसर दिया जा रहा है।
स्वागत से संवाद तक का संदेश
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पूर्व नक्सलियों को निवास पर भोजन के लिए आमंत्रित किया गया, औपचारिक स्वागत हुआ और व्यक्तिगत बातचीत भी हुई। उनके अनुसार, समाज की मुख्यधारा में लौटे लोगों के लिए सम्मान और संवाद ज़रूरी है, ताकि भरोसा बने और पुनर्वास टिकाऊ हो। यह कदम (Naxal Rehabilitation Program) की ज़मीनी मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
पुनर्वास की कहानी, ज़मीनी हकीकत
कई पूर्व नक्सलियों ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि अब वे पहले की तुलना में खुद को अधिक सुरक्षित और स्थिर महसूस करते हैं। रोजगार, पहचान और सामाजिक स्वीकार्यता—तीनों मोर्चों पर बदलाव दिख रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह पहल केवल भ्रमण नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों से परिचय कराने की प्रक्रिया है, जो आगे चलकर सामाजिक एकीकरण को मजबूत करेगी।
होली से पहले किसानों को बड़ी राहत
गृह मंत्री ने बताया कि होली से पहले 24 लाख किसानों के खातों में 10 हजार करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि यह राशि तय समयसीमा में सीधे खातों में पहुँचेगी, ताकि खेती-किसानी से जुड़े खर्चों में राहत मिले। इस कदम को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए तात्कालिक सहारा माना जा रहा है।
सदन के भीतर सवाल, बाहर आरोप—सरकार का जवाब
सदन में उठे सवालों और बाहर लगाए गए आरोपों पर सरकार ने कहा कि तथ्यों के आधार पर जवाब दिया गया है। कस्टोडियल डेथ से जुड़े आंकड़ों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए गृह मंत्री ने दावा किया कि जानकारी सदन में रखी गई, जबकि बाहर बयानबाज़ी से भ्रम फैलता है। सरकार का रुख है कि कोयला, डीएमएफ और शराब घोटाले जैसे मुद्दों पर भी जवाबदेही तय होगी।






