इंदौर में सामने आया जाली नोटों का मामला अब केवल अपराध नहीं, बल्कि सोच को झकझोरने वाली कहानी बन गया है। जांच में खुलासा हुआ कि नकली नोट किसी बाहरी गिरोह से नहीं आए थे, बल्कि कुछ छात्रों ने खुद अपने घर के भीतर उन्हें तैयार किया। यह पूरा मामला Fake Currency Printing Case की गंभीरता को उजागर करता है।
वेब सीरीज से मिला आइडिया
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने एक चर्चित वेब सीरीज देखकर नकली नोट छापने की बारीकियां समझीं। स्क्रीन पर दिखी कहानी को उन्होंने हकीकत में उतारने की कोशिश की और साधारण प्रिंटर, स्याही व कागज से नोट तैयार करने लगे। यही से Fake Currency Printing Case ने असली रूप लिया।
घर बना मिनी प्रिंटिंग प्रेस
आरोपियों ने अपने कमरे को पूरी तरह सेटअप में बदल दिया था। प्रिंटर, डिजाइन और कटिंग तक की व्यवस्था घर पर ही की गई। पुलिस ने मौके से 500 रुपये के कई जाली नोट बरामद किए, जो देखने में असली जैसे लग रहे थे, लेकिन बारीकी से जांच करने पर नकली निकले।
जल्दी पैसे का लालच
पूछताछ में यह भी सामने आया कि पूरे प्लान के पीछे जल्दी अमीर बनने का सपना था। एक आरोपी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था, जबकि अन्य दोस्त आसान कमाई के चक्कर में शामिल हो गए। यही लालच Fake Currency Printing Case की जड़ बना।
सोशल मीडिया से शुरू हुई साजिश
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि शुरुआती संपर्क सोशल मीडिया के जरिए हुआ। चैटिंग, कॉल और भरोसे के बाद नकली नोट चलाने की योजना बनी। हालांकि बाद में पुलिस की तकनीकी जांच ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं।
पुलिस की सतर्कता से खुलासा
कॉल डिटेल और डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस ने एक-एक कड़ी जोड़ी और मुख्य साजिशकर्ता तक पहुंच गई। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि नकली नोट कहां-कहां खपाए गए। Fake Currency Printing Case की जांच अभी जारी है।





