उज्जैन में (Fake Currency Racket) से जुड़े जिस गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, उसने पुलिस को भी चौंका दिया है। शुरुआती जांच में पता चला कि यह नेटवर्क 500 रुपये के नकली नोटों में 10 रुपये के असली नोटों के नंबर कॉपी करके ऐसे तैयार कर रहा था कि पहली नज़र में कोई भी धोखा खा जाए। आरोपितों का इरादा इन नोटों के सहारे भारी मात्रा में मादक पदार्थ खरीदने का था, क्योंकि सप्लायर्स अक्सर मौके पर नोट गिनते नहीं—बस गड्डी के हिसाब से माल सौंप देते हैं।
पांड्याखेड़ी ब्रिज के नीचे से दो युवक पकड़े गए, थैले में मिले साढ़े 17 लाख के नकली नोट
चिमनगंज क्षेत्र में दबिश के दौरान पुलिस ने हिमांशु उर्फ चीनू और दीपेश नाम के दो युवकों को हिरासत में लिया। उनके पास मिले थैले में करीब साढ़े 17 लाख रुपये के नकली 500-500 के नोट बरामद हुए, जिनकी प्रिंटिंग बेहद महीन तरीके से की गई थी। पूछताछ में दोनों ने माना कि वे इंदौर स्थित एक फ्लैट में अपने तीसरे साथी राजेश के साथ मिलकर इन नोटों को छापते थे।
पुलिस जब बताए गए फ्लैट पर पहुँची, तो वहां से प्रिंटिंग मशीन, हाई-सिक्योरिटी जैसा दिखने वाला पेपर, केमिकल, अधूरी शीटें और सुरक्षा धागे जैसी सामग्री मिली, जो इस पूरे (Fake Currency Racket) को और ज़्यादा स्पष्ट करती है। राजेश अभी फरार है।
Fake Currency Racket: 10 रुपये वाले नोटों के असली नंबर स्कैन कर 500 के नोटों में लगाया गया, बैंक नोट प्रेस से पुष्टि जारी
जांच में सामने आया कि नकली नोटों में जो नंबर छपे हुए थे, वे असल में 10 रुपये वाले नोटों की सीरीज़ से उठाए गए थे। गिरोह का मानना था कि छोटे मूल्य वाले नोट अक्सर कम ध्यान में रहते हैं, और उनका नंबर बड़े नोट पर जाने से पकड़ की संभावना कम हो जाएगी। इसी कारण पुलिस अब बैंक नोट प्रेस से इन नंबरों की आधिकारिक पुष्टि करा रही है, ताकि प्रिंटिंग की चेन और पुराने उपयोग का रिकॉर्ड मिल सके।
लाखों के नकली नोट एक बदमाश को भी दिए जा चुके थे, पुलिस अब ड्रग्स लिंक पर नज़र गड़ाए हुए
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह ने हीरामिल की चाल में रहने वाले एक बदमाश सोनू को भी लाखों रुपये के नकली नोट सौंपे थे। पुलिस उसकी तलाश में है, क्योंकि आशंका है कि वह इन्हें किसी स्थानीय या बाहरी ड्रग्स नेटवर्क में खपाने के लिए आगे बढ़ा चुका होगा।
जांच अधिकारी मानते हैं कि अगर समय रहते कार्रवाई न होती, तो यह गिरोह भारी मात्रा में मादक पदार्थ हासिल कर सकता था, जिससे शहर और आसपास के क्षेत्रों में अपराध का बड़ा जाल तैयार हो सकता था। फिलहाल पुलिस पूरे (Fake Currency Racket) के लिंक खंगाल रही है और माना जा रहा है कि आगे भी कई नाम सामने आ सकते हैं।
Fake Currency Racket: पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़े नेटवर्क पर लगाम, टीमों ने कई जगह दबिशें बढ़ाईं
पुलिस अब इंदौर, उज्जैन और आसपास के जिलों में लगातार दबिशें दे रही है। सूत्रों का कहना है कि यह गिरोह सिर्फ नकली नोट ही नहीं, बल्कि ड्रग्स की सप्लाई चेन तक भी पहुंच चुका था। यही कारण है कि इस केस को बेहद संवेदनशील मानते हुए जांच टीमों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
कई विभाग अब संयुक्त रूप से यह पता लगाने में जुटे हैं कि नोटों की सप्लाई किन-किन रास्तों से बाहर भेजी जाती थी और नकली करेंसी के जरिए कितनी डील पहले ही की जा चुकी है।





