सीजी भास्कर, 07 फरवरी | Fake Education Order Scam : खैरागढ़ जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फर्जी आदेश के सहारे वर्षों तक सरकारी सेवा करने वाले चार कर्मचारियों को जांच के बाद बर्खास्त कर दिया गया। सेवा समाप्ति के साथ ही उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिससे पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है।
2021 की नियुक्तियों पर उठा सवाल
मामले की जड़ वर्ष 2021 में की गई कुछ नियुक्तियों से जुड़ी है। टीकमचंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद को जिले के अलग-अलग स्कूलों और कार्यालयों में सहायक ग्रेड-3 एवं डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्त किया गया था। दस्तावेजों की नियमित जांच के दौरान इन नियुक्तियों को लेकर संदेह गहराने लगा।
आदेश का क्रमांक निकला फर्जी
जांच में सामने आया कि जिन आदेशों के आधार पर ये नियुक्तियां की गई थीं, वे राज्य शिक्षा आयोग के नाम से जारी जरूर किए गए थे, लेकिन उनका क्रमांक किसी शैक्षणिक आदेश का नहीं था। वही क्रमांक एक बैंक शाखा को जारी पत्र से मेल खा रहा था। इसके अलावा आदेशों पर किए गए हस्ताक्षर भी आधिकारिक रिकॉर्ड से अलग पाए गए।
नियमों के तहत तत्काल बर्खास्तगी
तथ्यों की पुष्टि के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, जिस पर धोखाधड़ी, कूटरचना और षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में मामला पंजीबद्ध किया गया।
स्कूलों और कार्यालयों में रही तैनाती
फर्जी आदेश के आधार पर मई 2022 में अलग-अलग विद्यालयों और शासकीय कार्यालयों में इनकी पदस्थापना की गई थी। कुछ कर्मचारी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में कार्यरत रहे, जबकि कुछ को बाद में कलेक्टोरेट की शाखाओं में भी अटैच किया गया। लंबे समय तक सेवा में बने रहना ही इस मामले को और गंभीर बनाता है।
मामला खुलते ही ली गई छुट्टी
अगस्त 2025 में जब दस्तावेजों की गहन जांच शुरू हुई, तब चारों कर्मचारियों ने अलग-अलग कारणों का हवाला देकर अवकाश ले लिया। हालांकि उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब और दस्तावेज विभागीय जांच में संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद विभाग ने अंतिम निर्णय लेते हुए कार्रवाई को अंजाम दिया।
आगे और नाम सामने आने की संभावना
जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि शासकीय सेवा में फर्जीवाड़ा किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जारी रहेगी और यदि इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।




