सीजी भास्कर, 11 नवंबर। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के हसौद थाना (Fake Liquor Case in Sakti) से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना में पदस्थ दो पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने और एक निर्दोष युवक को झूठे शराब मामले में फंसाने का आरोप लगा है। आरोप यह है कि पुलिसकर्मियों ने (Fake Liquor Case) 70 लीटर पानी को शराब घोषित कर दिया और आरोपी युवक से एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी।
युवक को झूठे केस में फंसाने का आरोप
ग्राम मल्दा निवासी भगत मित्तल ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर शिकायत की है कि उसके भाई महेंद्र मित्तल को हसौद थाना के प्रधान आरक्षक नंदू साहू और अश्वनी जायसवाल ने झूठे शराब प्रकरण में फंसाकर जेल भेज दिया। परिजनों के मुताबिक, 9 नवंबर को महेंद्र अपने निजी काम से हसौद आया था, तभी दोनों पुलिसकर्मियों ने उसे रोका और गाड़ी में बिठाकर करीब डेढ़ घंटे तक घुमाते रहे। इस दौरान उन्होंने उससे एक लाख रुपये की मांग की। जब उसने पैसे देने से इनकार किया, तो पुलिसकर्मियों ने कैथा के पप्पू ढाबा (Pappu Dhaba) में बोरी और पन्नी मंगाकर उसमें पानी डाल दिया और उसे 70 लीटर शराब घोषित कर दिया।
रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज भी सबूत
पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनके पास नंदू साहू द्वारा रिश्वत मांगने की (Audio Recording Evidence) रिकॉर्डिंग मौजूद है। साथ ही ढाबे का CCTV फुटेज भी है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि बोरी में पानी भरा गया था, शराब नहीं। परिवार ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत पुलिस अधीक्षक सक्ती (SP Sakti) से की है और आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधान आरक्षक अश्वनी जायसवाल (Ashwini Jaiswal) पहले भी इस तरह के आरोपों में चर्चा में रह चुका है। फिलहाल इस मामले पर (Police Department Response) पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि “अगर कानून के रखवाले ही कानून तोड़ेंगे, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी?”





