सीजी भास्कर, 12 अक्टूबर। देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने शनिवार को वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Crime Law Sensitivity) से निपटने वाले कानूनों के अमल में अधिक संवेदनशीलता और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कानून बनाने वालों को सफेदपोश अपराध (White Collar Crime Awareness) और परंपरागत अपराधों के बीच स्पष्ट अंतर करना चाहिए।
पूर्व सीजेआइ ने कहा कि हर वित्तीय कार्य या उसकी विफलता को एक ही दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने सांसदों से अपील की कि धोखाधड़ी, अनजाने में हुई गलती और प्रक्रियागत चूक (Financial Crime Law Sensitivity) के बीच स्पष्ट भेदभाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि सभी वित्तीय अनियमितताओं को समान नहीं माना जा सकता, क्योंकि हर मामले की प्रकृति और उद्देश्य भिन्न होता है।
उन्होंने कहा कि समस्या तब आती है जब विधायिका सफेदपोश अपराधों को परंपरागत अपराधों के बराबर (Financial Crime Law Sensitivity मान लेती है और उसके पीछे के मानसिक या इरादतन पहलू को अनदेखा कर देती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कानून का ज्ञान न होना किसी के लिए बहाना नहीं हो सकता, लेकिन कानून के अनुपालन में विवेकशील दृष्टिकोण जरूरी है।
पूर्व सीजेआइ खन्ना ने यह भी कहा कि वित्तीय अपराधों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है स्पष्ट आपराधिक इरादे से किए गए अपराध, लापरवाही या गलतफहमी से हुए अपराध और प्रक्रियागत चूक की वजह से हुए अपराध। उन्होंने चिंता जताई कि कई मामलों में अभियोजन पक्ष पर दोष सिद्ध करने का दबाव (Prosecution Burden in Financial Crimes) कम होता जा रहा है और आरोपित पर अपनी निर्दोषता साबित करने का बोझ बढ़ जाता है, जो न्यायिक दृष्टि से असंतुलित है।


