सीजी भास्कर, 24 दिसंबर। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि गांवों में लोगों की जिंदगी बदलती (Fisheries Scheme Chhattisgarh) नजर आ रही हैं।
खासकर मत्स्य पालन को प्रोत्साहन देने वाली योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं। इन्हीं योजनाओं का लाभ उठाकर बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के एक किसान ने स्वरोजगार की ऐसी मिसाल पेश की है, जो अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
वाड्रफनगर विकासखंड के हरिगंवा गांव के निवासी मुन्नालाल गोलदार पहले पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। सीमित संसाधनों और मौसम पर निर्भरता के कारण उनकी आमदनी भी सीमित थी।
इसी बीच मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने उन्हें शासन की मत्स्य पालन योजनाओं की जानकारी दी। मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग मिलने के बाद मुन्नालाल ने खेती के साथ-साथ मछली पालन को अपनाने का फैसला किया।
मुन्नालाल ने हरिगंवा जलाशय को पट्टे पर लेकर सघन मत्स्य पालन की शुरुआत की। उन्होंने रोहू, कतला, मृगल और कॉमन कार्प जैसी उन्नत मछली प्रजातियों का पालन (Fisheries Scheme Chhattisgarh) किया।
आधुनिक तकनीक, संतुलित आहार और नियमित देखरेख का असर यह हुआ कि कुछ ही समय में उत्पादन बेहतर होने लगा। आज स्थिति यह है कि उन्हें मछली पालन से हर साल करीब 2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है।
इस व्यवसाय में उनके परिवार के सदस्य भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। इससे न सिर्फ पारिवारिक आय बढ़ी है, बल्कि गांव में ही रोजगार का एक स्थायी साधन भी तैयार हुआ है। मुन्नालाल बताते हैं कि स्थानीय बाजार में मछलियों की मांग लगातार बनी रहती है, इसलिए बिक्री को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं होती।
आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद अब वे भविष्य की योजनाओं पर भी काम कर रहे हैं। मुन्नालाल का कहना है कि वे मछली पालन के साथ-साथ तालाब के पास कुक्कुट शेड बनाकर मुर्गी पालन शुरू करना चाहते हैं, ताकि आमदनी के स्रोत और बढ़ाए जा सकें।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार मत्स्य पालन (Fisheries Scheme Chhattisgarh) को बढ़ावा देने के लिए तालाब निर्माण, मछली बीज, परिपूरक आहार और आवश्यक उपकरणों पर अनुदान दे रही है।
इन्हीं योजनाओं का असर है कि आज मुन्नालाल गोलदार जैसे किसान मछली पालन को एक लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक व्यवसाय के रूप में स्थापित कर पा रहे हैं।


