सीजी भास्कर 1 फरवरी Foreign Aid Cut Bangladesh : केंद्रीय बजट 2026-27 में विदेश नीति से जुड़ा एक बड़ा संकेत सामने आया है। विदेशों में विकास सहायता के तहत भारत ने अपने पड़ोसी देशों को दी जाने वाली वित्तीय मदद की समीक्षा की है। इसी कड़ी में बांग्लादेश के लिए आवंटन में एक झटके में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी गई, जिसे मौजूदा द्विपक्षीय हालात से जोड़कर देखा जा रहा है।
आंकड़ों में छुपा रणनीतिक बदलाव
विदेश मंत्रालय के अंतर्गत विकास सहायता के लिए कुल आवंटन बढ़ाया गया है, लेकिन कुछ देशों के लिए रकम घटाई गई है। बांग्लादेश का बजट एलोकेशन 120 करोड़ रुपये से घटकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया। यह बदलाव दर्शाता है कि भारत अब आर्थिक सहयोग में भी रणनीतिक संतुलन अपनाने के मूड में है।
Foreign Aid Cut Bangladesh और बीते वर्षों की तुलना
पिछले वित्तीय वर्षों पर नजर डालें तो बांग्लादेश को दी जाने वाली मदद में उतार-चढ़ाव साफ दिखता है। एक समय जिस देश को बढ़ी हुई सहायता दी जा रही थी, अब उसके लिए सीमित आवंटन तय किया गया है। यह फैसला बताता है कि आर्थिक सहायता अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि व्यवहार और भरोसे से जुड़ा विषय बन चुकी है।
Foreign Aid Cut Bangladesh के साथ चाबहार प्रोजेक्ट पर ब्रेक
बजट में एक और अहम बदलाव ईरान के चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर सामने आया है। इस रणनीतिक परियोजना के लिए इस बार कोई भी फंड आवंटित नहीं किया गया। इससे पहले जिस प्रोजेक्ट को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की रीढ़ माना जा रहा था, उस पर फिलहाल वित्तीय विराम लग गया है।
Foreign Aid Cut Bangladesh और वैश्विक दबाव का असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते समीकरणों और कड़े प्रतिबंधों के माहौल में भारत ने अपने फैसलों में सतर्कता दिखाई है। चाबहार जैसे प्रोजेक्ट पर फंड रोकना यह संकेत देता है कि भारत अब वैश्विक दबावों और क्षेत्रीय हितों के बीच संतुलन साधने की नीति अपना रहा है।
Foreign Aid Cut Bangladesh के बीच भूटान-नेपाल को बढ़त
जहां कुछ देशों के लिए मदद घटाई गई, वहीं भूटान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों के लिए वित्तीय सहायता में इजाफा किया गया है। भूटान को सबसे ज्यादा आवंटन मिला है, जो ऊर्जा और बुनियादी ढांचे में भारत की दीर्घकालिक साझेदारी को दर्शाता है। यह बताता है कि भारत की पड़ोस नीति चयनात्मक लेकिन स्पष्ट होती जा रही है।
बदली हुई कूटनीति की झलक
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 में विदेश सहायता के फैसले केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि एक स्पष्ट कूटनीतिक संकेत भी हैं। बांग्लादेश के लिए कटौती और चाबहार पर रोक यह दिखाती है कि भारत अब आर्थिक मदद को रणनीतिक संवाद का हिस्सा बना रहा है, न कि सिर्फ औपचारिक सहयोग का माध्यम।




