सीजी भास्कर, 29 अप्रैल : सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां सात युवकों ने शादी समारोह से लौट रही दो नाबालिग बालिकाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इस हृदयविदारक घटना (Gangrape with Minors in Sitapur) ने पूरे अंचल में आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोप है कि पुलिस ने इस गंभीर मामले में शुरू से ही लापरवाही बरती और दबाव बढ़ने के बाद ही प्राथमिकी दर्ज की।
शादी से लौटते समय युवकों ने घेरा
जानकारी के अनुसार, सीतापुर थाना क्षेत्र के एक गांव में 24 अप्रैल की रात शादी का कार्यक्रम था। चार नाबालिग सहेलियां रात करीब 10 बजे समारोह से वापस लौट रही थीं। जहां गांव के स्कूल के पास आधा दर्जन मोटरसाइकिलों पर सवार 12 युवकों ने उन्हें घेर लिया। युवकों को देखकर एक नाबालिग मौके से भाग निकली, लेकिन बाकी तीन को आरोपितों ने पकड़ लिया। इस वारदात (Gangrape with Minors in Sitapur) के दौरान आरोपितों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं।
खेत और स्कूल मैदान में की दरिंदगी
आरोपितों ने एक नाबालिग को बाइक पर बैठाकर दूर खेत में ले गए, वहां चार युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वहीं दूसरी नाबालिग के साथ स्कूल मैदान के पास ही तीन युवकों ने दुष्कर्म किया। बताया जा रहा है कि एक तीसरी नाबालिग को भी युवक बाइक पर ले जा रहे थे, लेकिन वह सूझबूझ दिखाते हुए चलती बाइक से कूदकर भाग निकली। सामूहिक दुष्कर्म की शिकार दोनों बालिकाएं उसी रात घर पहुंची, लेकिन डर के मारे उन्होंने जानकारी नहीं दी। 25 अप्रैल को जब परिजनों को पता चला, तब वे थाने पहुंचे।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
आरोप है कि इतनी गंभीर घटना के बाद भी सीतापुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई नहीं की। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने तत्काल न तो एफआईआर दर्ज की और न ही पीड़िताओं का चिकित्सकीय परीक्षण (MLC) कराया। जब मामला गरमाया और जिला पंचायत सदस्य सहित ग्रामीणों का दबाव बढ़ा, तब जाकर 26 अप्रैल को एक नाबालिग की शिकायत पर प्रियांशु खलखो, आशीष, राहुल और एक अन्य के खिलाफ बीएनएस और पाक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। दूसरे प्रकरण में पुलिस अब भी एफआईआर की तैयारी ही कर रही है।
अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग
इस सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape with Minors in Sitapur) के मामले में जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने पुलिस प्रशासन को घेरा है। उन्होंने कहा कि दोनों पीड़िताएं आदिवासी समाज से हैं और पुलिस ने जांच में घोर लापरवाही बरती है। उन्होंने दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध भी तत्काल कार्रवाई की मांग की है। जहां कानून व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वही इस घटना ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। फिलहाल, क्षेत्र में तनाव का माहौल है और ग्रामीण सभी आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।


