सीजी भास्कर, 13 जनवरी। गरियाबंद जिले के पाण्डुका में संचालित पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय (Gariaband Navodaya School) के हॉस्टल में भूत-प्रेत और अंधविश्वास से जुड़ी अफवाहों ने बच्चों और अभिभावकों में भय का माहौल बना दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि छात्र-छात्राएं डर के कारण एक-एक कर हॉस्टल छोड़कर घर लौट रहे हैं, जिससे विद्यालय की पढ़ाई और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस मामले में कक्षा 6वीं की छात्रा हुमेश्वरी ढीढ़ी, निवासी ग्राम कुंडेल (फिंगेश्वर ब्लॉक), ने हॉस्टल में बुरी शक्ति का अहसास और अचानक तबीयत बिगड़ने का हवाला देते हुए विद्यालय छोड़ दिया है। छात्रा वर्तमान में अपने घर पर रह रही है।
“रात में दिखा सफेद कपड़ों में कोई”
एक छात्रा ने बताया कि नवोदय विद्यालय (Gariaband Navodaya School) में पढ़ाई शुरू करने के बाद से उसके साथ अजीब घटनाएं होने लगीं। उसके अनुसार, कई बार वह दो-दो घंटे तक बेहोश रही। एक रात करीब 1 बजे वाशरूम जाने के दौरान सफेद कपड़ों में किसी के खड़े होने का आभास हुआ, लेकिन लौटते समय वह दिखाई नहीं दिया। छात्रा का आरोप है कि जब उसने यह बात स्टाफ को बताई, तो उसे चुप रहने के लिए डांटा और धमकाया गया। डर और लगातार बिगड़ती तबीयत को देखते हुए छात्रा ने अपने माता-पिता को जानकारी दी, जिसके बाद वे उसे हॉस्टल से घर ले आए।
व्यवस्था लचर, जिम्मेदारी से बच रहा स्टाफ
छात्रा के माता-पिता का कहना है कि नवोदय विद्यालय का नाम बड़ा जरूर है, लेकिन हॉस्टल और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं बेहद कमजोर हैं। उनका आरोप है कि जब बच्ची की तबीयत खराब हुई, तो स्टाफ ने गंभीरता नहीं दिखाई और उल्टा जिम्मेदारी बच्चों और पालकों पर डाल दी। परिजनों ने बताया कि मेडिकल जांच में बच्ची की रिपोर्ट सामान्य आई है, लेकिन इसी तरह के डर के कारण दो अन्य बच्चे भी हॉस्टल छोड़ चुके हैं, जो चिंता का विषय है।
पढ़ाई पर असर, भविष्य को लेकर चिंता
इस पूरे घटनाक्रम (Gariaband Navodaya School) का सबसे बड़ा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। छात्रा हुमेश्वरी अब घर से परीक्षा में शामिल होने की अनुमति की गुहार लगा रही है। अभिभावकों का कहना है कि डर और मानसिक दबाव के कारण बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। यह मामला केवल अफवाह या अंधविश्वास तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हॉस्टल में बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
प्रशासन और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
मामले पर कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने मीडिया से चर्चा करते कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। सूचना मिलने पर मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्रा ने कहा कि इस उम्र में बच्चे डर, तनाव या शरारत के कारण ऐसी अनुभूतियां महसूस कर सकते हैं। उन्होंने इसे अंधविश्वास से जोड़ने के बजाय मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखने की सलाह दी।


