आशुतोष सिंह राजपूत
सीजी भास्कर, 05 मई : गरियाबंद जिले के अमलीपदर थाने के सामने पुलिस की कथित कार्रवाई ने कानून की निष्पक्षता पर कालिख पोत दी है। वाहन चेकिंग के नाम पर चल रहे इस तमाशे में पुलिस पर भेदभाव और खुलेआम अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय जनता में इस गरियाबंद पुलिस न्यूज (Gariaband Police News) को लेकर भारी आक्रोश है, क्योंकि यहां नियम केवल साधारण जनता के लिए हैं, जबकि रसूखदारों के लिए थाने के सामने से रेड कार्पेट बिछा हुआ है।
आम जनता पर सितम, वीआईपी को छूट
अमलीपदर थाने के सामने लगे बैरिकेड्स पर पुलिस की ‘दोहरी नीति’ साफ नजर आ रही है। ड्रिंक एंड ड्राइव और ट्रैफिक नियमों के नाम पर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को रोककर उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही कोई रसूखदार या राजनीतिक पहुंच वाला व्यक्ति नियम तोड़ते हुए निकलता है, पुलिस के हाथ जांच के बजाय सलाम ठोकने के लिए उठ जाते हैं। इस भेदभावपूर्ण गरियाबंद पुलिस न्यूज (Gariaband Police News) ने पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या कानून की किताबें चेहरों को देखकर बदली जाती हैं?
“500 दे दो वरना 1200 का चालान”: सरेआम सौदेबाजी
हद तो तब हो गई जब मौके पर मौजूद एक पुलिसकर्मी का कथित ऑडियो-वीडियो जैसा वाकया सामने आया। आरोप है कि वर्दी की धौंस दिखाते हुए पुलिसकर्मी ने एक व्यक्ति से साफ शब्दों में कहा— “500 रुपए दे दो, नहीं तो ऑनलाइन चालान करूंगा तो 1200 रुपए लगेंगे।” यह सरेआम की जा रही सौदेबाजी बताती है कि चेकिंग का मकसद यातायात सुधारना नहीं, बल्कि जेबें भरना है। इस सनसनीखेज गरियाबंद पुलिस न्यूज (Gariaband Police News) के सामने आने के बाद विभाग की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लग गया है।
निष्पक्ष जांच की मांग, आक्रोश में जनता
पुलिस की इस मनमानी ने अमलीपदर क्षेत्र में तनाव और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर रसूखदारों को बिना हेलमेट और बिना लाइसेंस के घूमने की आजादी है, तो आम जनता से ही सख्ती क्यों? लोगों ने जिले के आला अधिकारियों से मांग की है कि मौके पर तैनात उन पुलिसकर्मियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाए जो खाकी की आड़ में वसूली का अड्डा चला रहे हैं। अब देखना होगा कि गरियाबंद एसपी इस गंभीर मामले में क्या एक्शन लेते हैं।


