Gaudham Yojana Controversy : छत्तीसगढ़ में गौधाम योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता Dhananjay Singh Thakur ने सरकार की योजना पर सवाल उठाते हुए इसे महज प्रचार और घोषणाओं तक सीमित बताया है। उनका कहना है कि राज्य में बड़ी संख्या में मवेशी आज भी सड़कों पर भटक रहे हैं, जिससे न सिर्फ पशुधन की हालत खराब हो रही है, बल्कि सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि सरकार खुद मान चुकी है कि प्रदेश में 1 लाख 84 हजार से अधिक छुट्टा और घुमंतू मवेशी मौजूद हैं। इसके बावजूद बीते करीब सवा दो वर्षों में सिर्फ 11 गौधाम पंजीकृत किए गए और उनमें से भी केवल तीन ही पूरी तरह तैयार हो पाए हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े पशुधन के लिए यह व्यवस्था बेहद अपर्याप्त है।
गौधाम क्षमता और जमीन पर हकीकत
कांग्रेस का कहना है कि एक गौधाम में औसतन करीब 200 मवेशियों को रखने की क्षमता होती है। इस हिसाब से अब तक बने गौधामों में लगभग 600 पशुओं को ही आश्रय मिल पाया है, जबकि लाखों मवेशी अभी भी सड़कों और खेतों के आसपास घूम रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि इससे किसानों और आम लोगों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
चारे के खर्च पर भी उठे सवाल
कांग्रेस ने पशुओं के चारे के लिए तय की गई राशि को लेकर भी सरकार को घेरा है। प्रवक्ता का कहना है कि प्रति पशु प्रतिदिन 10 रुपये की राशि तय करना व्यवहारिक नहीं है। इतने कम खर्च में मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराना संभव नहीं है, जिससे योजना की व्यवहारिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौधाम निर्माण को लेकर भी लगाए आरोप
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार द्वारा 1460 गौधाम बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अभी तक इसका अधिकांश काम कागजों तक ही सीमित दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि इस योजना के जरिए कुछ खास लोगों को सरकारी जमीन देने की कोशिश की जा रही है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पुरानी योजनाओं का भी किया जिक्र
कांग्रेस ने अपनी पूर्ववर्ती सरकार के दौरान शुरू की गई Narva Garva Ghurva Bari Yojana का भी उल्लेख किया। पार्टी का कहना है कि उस योजना के तहत प्रदेश में लगभग 10 हजार गोठान बनाए गए थे, जिनमें से करीब 7 हजार आत्मनिर्भर बताए जाते थे। कांग्रेस का आरोप है कि वर्तमान सरकार ने कई गोठानों को बंद कर दिया, जिससे पशुधन प्रबंधन के साथ-साथ महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका भी प्रभावित हुई है।





