सीजी भास्कार 25 फ़रवरी छत्तीसगढ़ विधानसभा में गिग इकॉनमी से जुड़े युवाओं की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार से साफ पूछा कि Swiggy, Zomato, Blinkit और Rapido जैसी प्लेटफॉर्म कंपनियों में काम कर रहे गिग वर्करों को संगठित श्रेणी में रखा जाएगा या असंगठित में। विधायक ने कहा कि जब तक वर्गीकरण स्पष्ट नहीं होगा, तब तक (Gig Workers Rights in Chhattisgarh) केवल कागज़ी चर्चा बनकर रह जाएंगे।
आउटसोर्सिंग से गिग इकॉनमी तक, वही अधूरा ढांचा
अजय चंद्राकर ने सदन को याद दिलाया कि पहले आउटसोर्सिंग कंपनियों के मसले पर भी सरकार ने नियमों के अभाव की बात कही थी, और आज गिग वर्करों के मामले में तस्वीर नहीं बदली। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती गिग इकॉनमी के बीच नीति की सुस्ती युवाओं पर भारी पड़ रही है। उनके मुताबिक (Gig Workers Rights in Chhattisgarh) का सवाल अब सिर्फ श्रम नीति नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।
‘10 मिनट डिलीवरी’ मॉडल पर उठे सवाल, जान की कीमत पर स्पीड?
तेज डिलीवरी के दबाव को लेकर विधायक ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ‘10 मिनट डिलीवरी’ जैसे मॉडल गिग वर्करों की सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं—रफ्तार की होड़ में हादसे बढ़ रहे हैं, जबकि कंपनियों का मुनाफा बढ़ता जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों की चिंताओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि (Gig Workers Rights in Chhattisgarh) के तहत सुरक्षा मानकों का तय होना अब टालने लायक विषय नहीं रहा।
सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, नियमों की राह अब भी अधूरी
विधायक ने याद दिलाया कि 2020 में सामाजिक सुरक्षा संहिता लागू हो चुकी है, फिर भी स्पष्ट नियमों का अभाव गिग वर्करों को कानूनी सुरक्षा से दूर रखे हुए है। उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में केंद्र को नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा, क्योंकि नियम तय नहीं हो सके थे—जबकि कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर पहल कर दी। सवाल यह है कि क्या छत्तीसगढ़ भी (Gig Workers Rights in Chhattisgarh) को लेकर समवर्ती सूची के अधिकार का इस्तेमाल करेगा?
मंत्री लखनलाल देवांगन का जवाब—केंद्र के नियमों का इंतज़ार
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सदन में कहा कि फिलहाल गिग वर्करों को न संगठित श्रेणी में रखा गया है, न असंगठित में। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को शामिल किया गया है, और जैसे ही केंद्र सरकार नियम अधिसूचित करेगी, राज्य उसी के अनुरूप कदम उठाएगा। मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार की बनाई समिति की प्रक्रिया भी केंद्र के अधिनियम से तालमेल बैठाते हुए आगे बढ़ेगी—यानी (Gig Workers Rights in Chhattisgarh) का भविष्य फिलहाल केंद्रीय नियमों पर टिका है।






