सीजी भास्कर 4 फरवरी Gogunda Hill Security Operation : सुकमा जिले के गोगुंडा पहाड़ पर सुरक्षाबलों की कार्रवाई को नक्सल विरोधी अभियान में एक अहम प्रतीकात्मक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। जिस पहाड़ी को दशकों तक नक्सलियों का अभेद्य गढ़ माना जाता था, वहां अब सुरक्षा बलों का स्थायी नियंत्रण स्थापित हो चुका है।
40 साल पुराना ‘अजेय किला’ टूटा
स्थानीय जानकारों के मुताबिक, गोगुंडा पहाड़ पिछले करीब 40 वर्षों से नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। भारी सशस्त्र मौजूदगी और भौगोलिक दुर्गमता के चलते यहां तक पहुंचना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन हाल के महीनों में बदली रणनीति ने हालात पलट दिए।
नए कैंप से बदली ताकत की तस्वीर
इलाके में सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन का नया कैंप स्थापित होने के बाद सुरक्षाबलों की पकड़ मजबूत हुई। नियमित गश्त, इलाके की मैपिंग और स्थानीय इनपुट के चलते नक्सलियों की आवाजाही सीमित होती चली गई, जिससे ऑपरेशन को निर्णायक रूप दिया जा सका।
रमन्ना के स्मारक पर चला बुलडोजर
नक्सल संगठन के शीर्ष कमांडर और सेंट्रल कमेटी सदस्य रमन्ना की याद में बनाया गया करीब 20 फीट ऊंचा स्मारक भी इस कार्रवाई में ध्वस्त कर दिया गया। वर्ष 2020 में रमन्ना की मौत के बाद बनाया गया यह स्मारक नक्सली प्रभाव और डर का प्रतीक माना जाता था।
संयुक्त बलों की रणनीतिक कार्रवाई
स्मारक को गिराने के लिए सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन और कोबरा 201 बटालियन ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया। जवानों ने इलाके को चारों ओर से सुरक्षित कर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की, ताकि किसी भी तरह की प्रतिक्रिया या जोखिम से बचा जा सके।
विचारधारा पर सीधा प्रहार
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल भौतिक ढांचे को हटाने तक सीमित नहीं है। इसका मकसद उन प्रतीकों और स्मृतियों को खत्म करना भी है, जिनके सहारे नक्सली विचारधारा को जीवित रखने की कोशिश की जाती रही है।
बस्तर में बदलता सुरक्षा परिदृश्य
गोगुंडा पहाड़ पर नियंत्रण के साथ ही बस्तर के इस हिस्से में सुरक्षा स्थिति को लेकर नई तस्वीर उभर रही है। सुरक्षाबलों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे और इलाकों में दबदबा कायम कर नक्सली नेटवर्क को कमजोर किया जाएगा।




