सीजी भास्कर, 30 दिसंबर। साल 2025 में जबरदस्त तेजी के बाद सोना और चांदी अब अपने ऑल-टाइम हाई स्तरों से कुछ नीचे फिसलते नजर आ रहे हैं। हालिया गिरावट ने निवेशकों के सामने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या यह सिर्फ मुनाफावसूली और तकनीकी करेक्शन है या फिर इन धातुओं में कुछ समय के लिए सुस्ती का दौर शुरू हो सकता है। बाजार जानकारों का कहना है कि इस कमजोरी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें तकनीकी और मौसमी दोनों पहलू शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बीते सप्ताह में सोना-चांदी में आई तेज उछाल के बाद कीमतें (Gold-Silver Prices) जरूरत से ज्यादा खिंच गई थीं। इस दौरान लीवरेज्ड पोजीशन में फंसे निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया, जिससे ओवरबॉट जोन में पहुंचे मोमेंटम इंडिकेटर्स अब सामान्य स्तर की ओर लौट रहे हैं। इसी तकनीकी अनवाइंडिंग की वजह से कीमतों पर दबाव देखा गया।
घरेलू बाजार की स्थिति पर गौर करें तो गिरावट बहुत तेज नहीं रही। सोने के भाव विभिन्न शुद्धता स्तरों पर लगभग स्थिर बने हुए हैं, जबकि चांदी में सीमित कमजोरी दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल घबराहट में बिक्री नहीं कर रहे हैं, बल्कि ग्लोबल संकेतों के बीच सतर्क रुख अपना रहे हैं।
VT मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल का कहना है कि (Gold-Silver Prices) में स्थिरता और मैक्रोइकोनॉमिक रिस्क से मिलने वाला सपोर्ट इसे आने वाले साल में भी मजबूत कोर एसेट बनाए रख सकता है। सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीद भी इसे सपोर्ट देती है। वहीं, चांदी में ज्यादा तेजी की संभावना जरूर है, लेकिन इसकी कीमतें इंडस्ट्रियल मांग पर निर्भर होने के कारण उतार-चढ़ाव ज्यादा झेलती हैं।
मेहता इक्विटीज के वीपी (कमोडिटी) राहुल कलंत्री के अनुसार, हालिया उतार-चढ़ाव के पीछे टेक्निकल वजहों के साथ-साथ हॉलिडे सीजन में कम ट्रेडिंग और CME द्वारा मार्जिन बढ़ाए जाने जैसे फैक्टर्स भी जिम्मेदार हैं। इस कारण कई ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन कम करनी पड़ी। इसके बावजूद, (Gold-Silver Prices) पर जियोपॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल अनिश्चितता निचले स्तरों पर समर्थन देती हैं।
2025 में सोने की तुलना में चांदी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तेजी चांदी को करेक्शन के लिए संवेदनशील बनाती है। आर्थिक ग्रोथ में थोड़ी कमजोरी चांदी पर बड़ा असर डाल सकती है। इसके विपरीत, सोना संस्थागत निवेशकों की पसंद बना रह सकता है, खासकर तब जब राजकोषीय स्थिरता, करेंसी क्रेडिबिलिटी और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर चिंताएं बनी रहें।
निवेशकों के लिए संदेश साफ है कि (Gold-Silver Prices) में आने वाले समय में उतार-चढ़ाव रहेंगे। यह मौका मुनाफावसूली के साथ-साथ नए निवेशकों के लिए एंट्री पॉइंट भी हो सकता है। बाजार की लगातार निगरानी और समय पर निर्णय ही इस धातु निवेश में सफलता दिला सकते हैं।


