मुंगेली कलेक्ट्रेट के पर्यावरण अधोसंरचना विकास उपकर खाते से 26.87 लाख रुपये की अनधिकृत निकासी पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर कुंदन कुमार ने मामले को “गंभीर फाइनेंशियल फ्रॉड” करार देते हुए कहा कि शासकीय खाते से एक पल के लिए भी निजी खाते में रकम जाना अपराध की श्रेणी में आता है। संबंधित खाता Central Bank of India, शाखा मुंगेली में संचालित बताया गया है—यहीं से (Government Bank Fraud) का एंगल और गहराता है।
रकम लौटा देना बहाना नहीं, ट्रांजेक्शन कैसे हुए—यही असली सवाल
जांच में सामने आया कि तीन बड़े ट्रांजेक्शन (करीब 9 लाख, 8 लाख और लगभग 6 लाख रुपये) किए गए, जबकि बैंक रिकॉर्ड में कुल छह एंट्री दर्ज हैं। प्रशासन का सवाल साफ़ है—इतनी बड़ी रकम पर शाखा प्रबंधक की आईडी के बिना ट्रांजेक्शन संभव कैसे हुआ? “लंच टाइम में कर्मचारी ने कर दिया” जैसी दलील को कलेक्टर ने गैर-जिम्मेदाराना बताया। यह प्रकरण (banking system lapse) की ओर इशारा करता है, जहां प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं—यही जांच का केंद्र है।
खाताधारक को भनक तक नहीं, e-KYC में खुला मामला
सूत्रों के अनुसार यह खाता अपर कलेक्टर जी.एल. यादव के प्रभार में था। वर्ष 2019–20 की राशि को शासकीय खजाने में जमा कराने के निर्देशों के बाद जब e-KYC कराया गया, तब पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। प्रशासन पूछ रहा है—खाताधारक की जानकारी/अनुमति के बिना निजी खातों में पैसा कैसे ट्रांसफर हुआ? यह पहलू (unauthorized transactions) की गंभीरता को रेखांकित करता है।
सिर्फ निलंबन काफी नहीं, जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
बैंक प्रबंधन ने संबंधित कर्मचारी के निलंबन की बात कही है, लेकिन प्रशासन इसे पर्याप्त नहीं मान रहा। कलेक्टर का कहना है कि यदि मैनेजर आईडी के बिना ट्रांजेक्शन संभव नहीं, तो जिम्मेदारी की श्रृंखला तय करनी होगी। गोलमोल जवाबों से सवाल खत्म नहीं होते—यही वजह है कि (accountability in banks) अब जांच का अहम बिंदु बन चुका है।
विजिलेंस एंगल, दस्तावेज़ों पर टिकी अगली कार्रवाई
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, प्रकरण की जांच विजिलेंस टीम कर रही है। बैंक से मांगे गए दस्तावेज़ और स्टेटमेंट अब तक संतोषजनक नहीं माने गए हैं। संकेत साफ़ हैं—यदि जवाब और साक्ष्य पूरे नहीं आए, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई तय है। यह मामला सिर्फ रकम का नहीं, बल्कि शासकीय धन की सुरक्षा और बैंकिंग निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता का है—(financial governance) अब कसौटी पर है।






