सीजी भास्कर 15 दिसम्बर Government Doctors Private Practice : बिलासपुर में स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों में बिना सूचना सेवाएं दे रहे सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि नियमों की अनदेखी करने वाले डॉक्टरों पर जल्द छापामार कार्रवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने पर नर्सिंग होम एक्ट के तहत कदम उठाए जाएंगे।
ओपीडी से गायब, निजी अस्पतालों में मौजूद रहने की शिकायत
स्वास्थ्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि जिला अस्पताल और अन्य शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ डॉक्टर ओपीडी समय पर उपलब्ध नहीं रहते। जांच में यह भी सामने आया कि कई डॉक्टर उसी दौरान निजी अस्पतालों में मरीज देख रहे हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
सिम्स से जुड़ी शिकायतें सबसे अधिक
शिकायतों में यह तथ्य सामने आया है कि सिम्स से जुड़े डॉक्टरों के निजी अस्पतालों में सेवाएं देने के मामले सबसे अधिक हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कई मामलों में इसकी औपचारिक जानकारी संस्थान प्रबंधन को भी नहीं दी गई। नतीजतन, मरीजों को लंबे समय तक डॉक्टर का इंतजार करना पड़ता है या वे इलाज से वंचित रह जाते हैं।
नियम स्पष्ट, पालन में लापरवाही
सरकारी डॉक्टरों के लिए निजी प्रैक्टिस को लेकर स्पष्ट नियम तय हैं। इसके तहत डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस का समय, स्थान और उससे होने वाली आय की जानकारी विभाग को देनी होती है। ओपीडी समय में निजी प्रैक्टिस पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कई डॉक्टर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जबकि इसके लिए शपथ पत्र जमा करना भी अनिवार्य है।
मरीजों पर सीधा असर, व्यवस्था पर सवाल
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निजी प्रैक्टिस पर रोक नहीं है, लेकिन पारदर्शिता जरूरी है। जब डॉक्टर सरकारी ड्यूटी के समय निजी अस्पतालों में इलाज करते हैं, तो इसका सीधा असर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता और व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
जल्द शुरू होगी कार्रवाई, नजर हर निजी अस्पताल पर
स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जल्द ही विशेष टीम बनाकर निजी अस्पतालों में औचक जांच की जाएगी। बिना अनुमति सेवाएं देने वाले सरकारी डॉक्टरों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।






