सीजी भास्कर, 08 जनवरी। पाकिस्तान में चरमपंथी संगठनों के आपसी रिश्तों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े (Hamas Commander Pakistan) हो गए हैं। पंजाब प्रांत के गुजरांवाला में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हमास के सीनियर कमांडर नजी जहीर की मौजूदगी सामने आई है। यह कार्यक्रम पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग के बैनर तले आयोजित किया गया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा संगठन माना जाता है।
मुख्य अतिथि बनकर मंच पर पहुंचे
कार्यक्रम में नजी जहीर को बतौर मुख्य अतिथि मंच पर देखा गया। पारंपरिक केफीयेह पहने हुए उन्होंने भाषण दिया, जिसे वहां मौजूद लोगों ने नारों और तालियों के साथ समर्थन दिया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जिन संगठनों से यह मंच (Hamas Commander Pakistan) जुड़ा है, उन्हें संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राज्य अमेरिका पहले ही आतंकी सूची में शामिल कर चुके हैं। इसके बावजूद खुलेआम ऐसे आयोजनों का होना पाकिस्तान की नीति और मंशा पर सवाल खड़े करता है।
लश्कर कमांडर से मुलाकात की पुष्टि
खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान नजी जहीर की मुलाकात लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर राशिद अली संधु से भी हुई। कार्यक्रम के दौरान दोनों एक ही मंच पर नजर आए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि यह आयोजन पूरी तरह लश्कर से जुड़े ढांचे के तहत हुआ, जिसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरे के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पहले भी पीओके में सक्रियता
नजी जहीर इससे पहले भी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का दौरा कर चुके हैं। फरवरी 2025 में उन्होंने पीओके में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कमांडरों के साथ भारत विरोधी रैली को संबोधित किया था। यह दौरा पहलगाम आतंकी हमले से कुछ ही सप्ताह पहले हुआ था, जिसके चलते उनकी गतिविधियों को और अधिक गंभीरता से आंका जा रहा है।
2023 के बाद बढ़ी गतिविधियां
विशेषज्ञों के अनुसार, अक्टूबर 2023 में इजराइल पर हमास के हमले के बाद नजी जहीर के पाकिस्तान से संबंध और मजबूत (Hamas Commander Pakistan) हुए। इसके बाद वे क्वेटा, कराची और इस्लामाबाद में आयोजित कई धार्मिक व राजनीतिक सम्मेलनों में शामिल हुए। यहां तक कि उन्हें कानूनी संस्थाओं और बार एसोसिएशन के मंचों पर सम्मानित किए जाने की घटनाएं भी सामने आईं।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी
सुरक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि नजी जहीर की लगातार और सार्वजनिक मौजूदगी इस बात का संकेत है कि हमास और पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी संगठनों के बीच वैचारिक और रणनीतिक नजदीकियां बढ़ रही हैं। यह स्थिति न केवल भारत, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती के रूप में देखी जा रही है।





